Friday, 26 August 2016

बढ़ते एनपीए से सबक सीखने को तैयार नहीं सरकारी बैंक

सरकारी बैंकों के लगातार बढ़ते एनपीए के बावजूद वैंक इनसे कुछ भी सबक लेने को तैयार नहीं हैं।

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। फंसे कर्जे (एनपीए) से सरकारी बैंको को होने वाले नुकसान को लेकर लगातार नए आंकड़े आ रहे हैं। इसके बावजूद ये बैंक सबक सीखने के लिए तैयार नहीं हैं। अगर कुछ सीखते तो रिजर्व बैंक (आरबीआइ) की बार-बार चेतावनी देने के बाद सरकारी बैंको ने कर्ज नहीं लौटाने वालों का केंद्रीय डाटाबेस जरूर तैयार लिया होता। बहरहाल, नए आरबीआइ गवर्नर उर्जित पटेल फ्रॉड करके या गलत सूचना देकर बैंकों से कर्ज लेने वाले ग्राहकों का डाटा बैंक बनाने के काम को वरीयता देंगे।

सूत्रों के मुताबिक आरबीआइ ने उच्च स्तर पर हाल ही में सभी बैंकों की ओर से एनपीए (नॉन परफॉरमिंग असेट्स) के प्रबंधन के लिए उठाए जा रहे कदमों की समीक्षा की है। इसमें यह बात सामने आई है कि ग्राहकों के स्तर पर हो रहे फ्रॉड को रोकने के लिए बैंकों की कोई तैयारी नहीं है। बैंकों के पास अभी ऐसी आतंरिक व्यवस्था तक नहीं है, जिससे धोखाधड़ी करने वाले या गलत सूचना देकर लोन लेने वालों पर पूरी तरह से लगाम लग सके। इसे रोकने के लिए सभी बैंकों से कहा गया था कि वे ऐसे फ्रॉड करने वाले ग्राहकों की सूची बनाएं, लेकिन अभी तक यह काम भी नहीं हो सका है। कई बैंक तो केंद्रीय तौर पर कर्ज के आवेदनों को निपटारा करना भी शुरू नहीं कर पाए हैं।

रिजर्व बैंक के ताजा आंकड़ों ने एनपीए से सरकारी बैंकों के मुनाफे पर लगी चपत को नए सिरे से उजागर किया है। इससे पता चलता है कि मार्च, 2016 को समाप्त वित्त वर्ष के दौरान सरकारी बैंकों ने फंसे कर्जो के मद में कुल 1,44,608 करोड़ रुपये का समायोजन किया है। एक वर्ष पहले यानी मार्च, 2015 को समाप्त वर्ष में सिर्फ 57,482 करोड़ रुपये का समायोजन इस मद में किया गया था। इस दौरान निजी बैंकों ने 20,099 करोड़ रुपये के प्रावधान एनपीए के लिए किए हैं।

इतनी बड़ी राशि का समायोजन करने का असर यह हुआ कि सरकारी बैंकों को पिछले वित्त वर्ष के दौरान संयुक्त तौर पर 20,006 करोड़ रुपये का घाटा उठाना पड़ा है। इस दौरान निजी बैंकों ने 39,672 करोड़ और मुठ्ठी भर विदेशी बैंकों ने 12,619 करोड़ रुपये का शुद्ध मुनाफा कमाया है।

Courtesy: jagran. Com

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