स्कॉटलैंड के वैज्ञानिकों ने पहली बार जेलीफिश में मौजूद प्रोटीन से लेजर बनाने में सफलता हासिल की है।
लंदन। स्कॉटलैंड के वैज्ञानिकों ने पहली बार जेलीफिश में मौजूद प्रोटीन से लेजर बनाने में सफलता हासिल की है। शोधकर्ताओं ने इसे पारंपरिक लेजर से कहीं ज्यादा प्रभावशाली और सघन बताया है। इसकी मदद से क्वांटम फिजिक्स और ऑप्टिकल कंप्यूटर के क्षेत्र में शोध के नए रास्ते खुलने की संभावना जताई गई है।
वैज्ञानिक इस खोज को पोलेरिटन लेजर की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति मान रहे हैं। इसकी मदद से बायोमेडिकल इमेजिंग के क्षेत्र में भी जबर्दस्त बदलाव आने की आस जगी है। इससे शोधकर्ता सेल्स के अंदर की प्रक्रिया की निगरानी कर सकेंगे। ऐसा होने पर कई तरह की खतरनाक बीमारियों से निपटा जा सकेगा।
पोलेरिटन लेजर -273 डिग्री सेल्सियस पर संघनित बोस कणों का इस्तेमाल करने में सक्षम होता है। इसको सामान्य तापमान पर संचालित करने में भी सफलता मिली है। शोध में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले प्रोफेसर माल्ट गेदर ने इसे क्वांटम फिजिक्स के क्षेत्र में उल्लेखनीय कदम करार दिया है। इसमें जर्मनी के वैज्ञानिक भी शामिल थे।
Courtesy: jagran. Com
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