अफस्पा के खिलाफ 16 साल तक भूख हड़ताल करने वाली इरोम शर्मिला को आज पूरी दुनिया पहचानती है। देश-विदेश में उनके लाखों प्रशंसक हैं, लेकिन इस 'आयरन लेडी' के पास अपने ही राज्य मणिपुर में पहचान साबित करने के लिए कोई आधिकारिक दस्तावेज नहीं है।
बीते 9 अगस्त को अनशन तोड़ने वाली 44 वर्षीय शर्मिला चुनाव लड़ने की इच्छा जता चुकी है, लेकिन अपनी नागरिकता साबित करने के लिए न तो उनके पास मतदाता पहचान पत्र है, न पैन कार्ड और न ही आधार कार्ड। यहां तक कि उनका बैंक खाता भी नहीं है।
उनके दोस्तों का कहना है कि चुनाव लड़ने के लिए इन दस्तावेजों की जरूरत होगी, इसलिए वे इन्हें तैयार कराने में जुट गए हैं। शर्मिला के एक दोस्त का कहना है, 'चुनाव लड़ने के लिए जनता से पैसा जुटाना होगा। इसके लिए बैंक खाता चाहिए, जो बिना पैन कार्ड के संभव नहीं। इसके लिए बिना मतदाता पहचान पत्र के चुनाव लड़ने के बारे में सोचा भी नहीं जा सकता।'
चार दोस्तों ने नहीं छोड़ा साथ
अनशन खत्म करने के फैसले के बाद शर्मिला के परिवार वाले भी उनसे नाराज हो गए, लेकिन उनके चार दोस्तों नंदिनी, रंजीता, मोनिका और रीतिका ने उनका साथ नहीं छोड़ा। नंदिनी कहती हैं, 'हम जानते हैं कि वह मजबूत हैं। लेकिन मजबूत से मजबूत व्यक्ति को भी साथ की जरूरत होती है।' ये चारों 9 अगस्त से ही शर्मिला के साथ अस्पताल में रुकी हुई हैं। इनका कहना है कि अगले चुनावों में शर्मिला को अधिकतर उन युवाओं का समर्थन मिलेगा, जो पहली बार वोट डालेंगे। कुछ ने 'न्यू जर्नी' (नई यात्रा) से फेसबुक पेज भी शुरू कर दिया है।
हल्का खाना शुरू किया
इन्हीं दोस्तों की मदद से शर्मिला ने धीरे-धीरे हल्का खाना खाना शुरू दिया है। तरल पदार्थ के अलावा शर्मिला मसले हुए केले, ओट्स, काॠर्नफ्लेक्स और खीरा आदि खा रही है।
Courtesy:livehindusthan. Com
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