Sunday, 14 August 2016

नेत्रहीन बेटी ने किया कमाल, चढ़ गई हजारों फीट ऊंचा पहाड़

11 साल पहले डॉक्टर की एक गलती ने उस बेटी की आंखों की रोशनी छीन ली। लेकिन उसके हौंसने अब दुनिया की आंखें खोल दी हैं। जानेंं कैसे ?

चंडीगढ़, [वेब डेस्क]। 11 साल पहले पहले डॉक्टर की एक गलती ने उसकी आंखों की रोशनी छीन ली लेकिन उसका हौसला कोई नहीं छीन पाया। आज उसी हौसले की बदौलत वह दुनिया की एकलौती दिव्यांग पर्वतारोही है। ये कहानी है 19 साल की छोनजिन अंगमो की। वह देख नहीं सकती लेकिन उसका हौसले को देख अब हर कोई उसका मुरीद है।

अंगमो ने हाल ही में हिमाचल की 17, 553 फीट ऊंची फ्रेंडशिप पीक पर चढ़ाई की है। उसकी इस सफलता से उसके माता-पिता भी अचंभित हैं। अंगमो का अगला लक्ष्य अब इंटरनेशनल पैरा कलाइंबिंग कंपीटीशन में फतेह करना है।

तीन महीने पुरानी है असाधारण सफलता की ये साधारण सी कहानी

साधारण सी लड़की से पर्वतारोही बनने की अंगमो की कहानी सिर्फ तीन महीने पुरानी है। अभी मई में ही वह दिव्यांगों के लिए लगाए गए कैंप में हिस्सा लेने के लिए हिमाचल गई थी। अंगमो ने बताया कि इस दौरान वह घबराई हुई तो थी लेकिन मन में एक विश्वास भी था।

मां-बाप को पता तक नहीं, भाई-बहनों ने दिया साथ

हिमाचल की रहने वाली अंगमो ने अपना पर्वतारोहण करने की बात मां-बाप को नहीं बताई थी। वह चंडीगढ़ में अपने भाई-बहनों के साथ रहती है। उसने उन्हें ही भरोसे में लिया औऱ एक असाधारण काम कर दिखाया। अब अंगमो के माता-पिता उसकी इस सफलता पर अचंभित भी हैं और खुश भी।

पहले उड़ा मजाक, अब हर कोई अचंभित

अंगमो ने बताया कि तीन महीनेे पहले तक उसने ऐसा सोचा भी नहीं था। लेकिन कैंप में उसे हौसला मिला। इसके बाद उसने पर्वतारोहण की ठानी। इसके बाद जब वह पर्वतारोहण की बात करती तो लोग उसका मजाक उड़ाने लगते। लेकिन अब सब उसकी इस सफलता पर अचंभित हैं।

अगला लक्ष्य, अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता

अंगमो फिलहाल दिल्ली में इंडियन माउंटेनियरिंग फेडरेशन (आईएफएस) की ओर से तैयारी कर रही है। इंडियन माउंटेनियरिंग फाउंडेशन में यूथ वैलफेयर के चेयरमैन कीर्ति पायस बताते हैं कि भारत में अभी तक कोई दृष्टिहीन पर्वतारोही नहीं है। छोनजिन का अगला लक्ष्य अब इंटरनेशनल कॉम्पिटिशंस में परचम लहराना है।

Courtesy: jagran. Com

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