सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से बर्थ कंट्रोल और परिवार नियोजन कार्यक्रमों में एनजीओ को शामिल करने का मापदंड बताने को कहा है।
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से बर्थ कंट्रोल और परिवार नियोजन कार्यक्रमों में एनजीओ को शामिल करने का मापदंड बताने को कहा है। जस्टिस मदन बी लोकुर और जस्टिस यूयू ललित की पीठ ने सवाल किया, "किस आधार पर एनजीओ को परिवार नियोजन शिविर आयोजित करने का अधिकार दिया गया है।
इसका मापदंड क्या है? यह सिद्धांत पर आधारित है या किसी अधिकारी का निजी फैसला है।" सवाल पूछे जाने से पहले केंद्र ने पीठ से कहा था कि उसके पास इस तरह के परिवार नियोजन शिविरों से छुटकारा पाने की योजना है। अदालत को एनजीओ द्वारा आयोजित लचर बंध्याकरण शिविरों के बारे में सूचित किया।
अदालत ने पूछा कि पीड़ित परिवारों को मुआवजा दिया गया या नहीं। अदालत में देविका बिस्वास ने अपनी जनहित याचिका में इस तरह के शिविरों में असुरक्षित बंध्याकरण किए जाने की ओर ध्यान दिलाया है। याची ने महाराष्ट्र, केरल, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड में असुरक्षित स्थिति में शिविर आयोजित किए जाने का उल्लेख किया है।
Courtesy: jagran. Com
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