नारायण मलिक ने कहा कि वो न्यूरोलॉजिस्ट बनना चाहते हैं क्योंकि उनके पिता की मृत्यु ब्रेन ट्यूमर की वजह से हुई थी। नारायण ने एम्स द्वारा आयोजित परीक्षा में 13वां स्थान हासिल किया है।
भुवनेश्वर। 'हौसले हालातों के मोहताज नहीं होते..' ये बात फिर एक बार साबित हुई है और इसे इस बार साबित किया है गंजम जिले के बंजानगर में रहने वाले 18 साल के नारायण मलिक ने जिन्होंने सारी परेशानियों को पार करते हुए एम्स द्वारा आयोजित परीक्षा में 13वां स्थान हासिल किया है। नारायण मलिक आदिवासी हैं और उनके माता पिता की भी मृत्यु हो चुकी है।
नारायण मलिक ने कहा कि वो अपने परीक्षा परिणाम से बहुत खुश हैं क्योंकि उन्हें अपने आर्थिक हालातों से लग रहा था कि वो कभी भी किसी बड़े संस्थान में मेडिकल की पढाई नहीं कर पाएंगे।
नारायण मलिक ने कहा कि वो न्यूरोलॉजिस्ट बनना चाहते हैं क्योंकि उनके पिता की मृत्यु ब्रेन ट्यूमर की वजह से हुई थी और अब उनका सपना है कि वो न्यूरोलॉजिस्ट बनकर उन गरीब और असहाय लोगों की मदद कर सकें जोकि इस बीमारी से ग्रस्त है।
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