Wednesday, 22 June 2016

पठानकोट एअरबेस के पास छिपे हैं आतंकवादी, फिर कर सकते हैं एयरबेस पर हमला

गृह मामलों पर संसद की स्थायी समिति ने मंगलवार को कहा कि संवेदनशील पठानकोट एअरबेस के करीबी गांवों में आतंकवादी छिपे हुए हैं और वे एअरबेस पर नए सिरे से हमला कर सकते हैं। समिति ने कहा कि सरकार को इसके बारे में सूचित कर दिया गया है और रणनीतिक रूप से महत्त्वपूर्ण केंद्र की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। समिति अंतरराष्ट्रीय सीमा के आसपास सुरक्षा बंदोबस्त की समीक्षा करने जम्मू पहुंची और इससे पहले उसने पठानकोट का दौरा किया था। समिति के अध्यक्ष पी भट्टाचार्य ने मंगलवार को यहां पत्रकारों से कहा, ‘पठानकोट से लौटने के बाद हमने सरकार के सामने अपने सुझाव रखे और कहा कि पठानकोट पर फिर हमला हो सकता है। गांव वालों ने हमें बताया कि कुछ आतंकवादी अब भी वहां के गांवों में छिपे हुए हैं।’

उन्होंने बताया कि समिति की सिफारिश के बाद सरकार ने सीआरपीएफ, बीएसएफ और सेना को सतर्क किया था और एअरबेस की सुरक्षा उनके हवाले कर दी थी।
भट्टाचार्य ने कहा, ‘क्या आपको पता है कि कुछ दिन पहले सरकार ने सीआरपीएफ, बीएसएफ और सेना से वायुसैनिक स्टेशन की सुरक्षा संभालने को कहा था क्योंकि कुछ आतंकवादी वहां छिपे हुए हैं। वे वहां कैसे छिपे हुए हैं, यह पता लगाने का काम मेरा नहीं है, लेकिन जैसा कि हमें ग्रामीणों से जानकारी मिली, तो बहुत साफ था कि वे कहीं तो छिपे हैं। हमने इस बारे में सरकार को सूचित कर दिया।’

भारत सरकार की ओर से पाकिस्तानी जांच दल को दो जनवरी को हुए आतंकवादी हमले की जांच के लिए पठानकोट एअरबेस जाने की इजाजत दिए जाने के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि वह पाकिस्तान के खुफिया अधिकारियों को रणनीतिक रूप से महत्त्वपूर्ण केंद्र का दौरा करने की अनुमति देने के पक्ष में नहीं थे। भट्टाचार्य ने कहा, ‘समिति पाकिस्तान की इस खुफिया शाखा को यहां बुलाने के भारत सरकार के विचार का समर्थन नहीं करती। किसलिए? लेकिन भारत सरकार की किसी विदेशी नीति के लिए हम उचित मंच नहीं हैं, हम इसे करने या नहीं करने का फैसला नहीं ले सकते।’

पाकिस्तान के पांच सदस्यीय संयुक्त जांंच दल ने 27 से 31 मार्च के बीच भारत का दौरा किया था और हमले के सिलसिले में सबूत जमा किए थे। भट्टाचार्य ने कहा कि नीति संबंधी दिशा निर्देश भारत सरकार को तय करने हैं। उन्होंने कहा, ‘समिति ने भारत-बांग्लादेश सीमा और भारत-पाकिस्तान सीमा के सघन दौरे किए और अब हम श्रीनगर की ओर जा रहे हैं।’ उन्होंने कहा, ‘हम पठानकोट गए थे जो सबसे अधिक संवेदनशील इलाका है।’ समिति ने कहा कि वह घुसपैठ रोकने के लिए बीएसएफ के उठाए जा रहे कदमों से संतुष्ट हैं लेकिन उसने सीमा सुरक्षा बल को पूरी तरह आधुनिक उपकरण मुहैया कराने की वकालत भी की।

भट्टाचार्य ने कहा, ‘फिलहाल उन्होंने हमें बताया कि वे किस तरह से घुसपैठ रोकने की कोशिश कर रहे हैं। आप नहीं कह सकते कि आज या कल क्या होने वाला है लेकिन अब तक सब कुछ ठीक है।’ अंतरराष्ट्रीय सीमा पर पाकिस्तान द्वारा कंक्रीट के बंकर बना कर अंतरराष्ट्रीय नियमों को तोड़े जाने के संबंध में पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि भारत को बहुत गंभीरता के साथ पाकिस्तान के साथ इस मामले को उठाना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘जैसा कि मैं भारत सरकार के रुख से वाकिफ हूं, उन्होंने इस मुद्दे पर बहुत कड़ा रुख अख्तियार किया है।’

भट्टाचार्य ने कहा कि जम्मू और देश के अन्य हिस्सों में अंतरराष्ट्रीय सीमा पर पहरा दे रहे बीएसएफ के जवानों को अत्याधुनिक सुविधाओं और उपकरणों की जरूरत है। सीमा पर सैनिकों के सामने आने वाली समस्याओं का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि समिति अपनी सिफारिशें गृह मंत्रालय और विदेश मंत्रालय के सामने रखेगी और उनसे इनके समाधान की अपेक्षा रखेगी। उन्होंने कहा, ‘फिलहाल हम अपनी सिफारिशों के बारे में आपको नहीं बता सकते, लेकिन हमने कुछ टिप्पणियां की हैं और उन समस्याओं का समाधान गृह मंत्रालय या विदेश मंत्रालय को करना है। हम इन दस्तावेजों को भारत सरकार को सौंप देंगे, उसके बाद गृह मंत्रालय और विदेश मंत्रालय को सभी समस्याओं का समाधान करना होगा, शांति बना कर रखनी होगी और देश के इस हिस्से में पूरी तरह सौहार्द सुनिश्चित करना होगा।’

भट्टाचार्य ने कहा कि समिति को जम्मू क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सीमा के आसपास रहने वाले किसानों के सामने आने वाली समस्याओं पर चर्चा करने का अवसर भी मिला और वह भारत सरकार से इन दिक्कतों पर जल्द से जल्द ध्यान देने को कहेगी।

No comments:

Post a Comment