सरकार के नौ क्षेत्रों में सौ फीसदी एफडीआई के फैसले से वाम दलों के साथ-साथ किसान संघ इसका विरोध कर रहे हैं।
नई दिल्ली, (जागरण ब्यूरो)। नौ क्षेत्रों में सौ फीसदी विदेशी निवेश से जहां बाजार उत्साहित है वहीं वामदलों के साथ-साथ संघ के अनुषांगिक संगठनों ने इस फैसले को देश के लिए घातक करार दे दिया है।
स्वदेशी जागरण मंच के बाद भारतीय किसान संघ ने इसका विरोध किया है और आगाह किया कि फैसला वापस नहीं लिया जाता है तो सरकार की छवि धूमिल होगी। वहीं भाकपा ने आशंका जताई कि रक्षा क्षेत्र में भारत अमेरिका और इजरायल पर आश्रित हो जाएगा।
भाकपा सेंट्रल कमेटी ने सौ फीसद विदेशी निवेश पर चिंता जताते हुए कहा कि रक्षा क्षेत्र में एफडीआइ जहां देश की संप्रभुता के लिए खतरा है। वहीं दूसरे क्षेत्रों में भी मेक इन इंडिया के छद्म वेश में केवल एसेंबलिंग यूनिट आएगी और देश की मध्यम व लघु औद्योगिक इकाइयां बंद हो जाएंगी। जबकि फार्मा क्षेत्र में एफडीआइ के बाद अधिग्रहण बढ़ेगा। कुल मिलाकर देश का नुकसान होगा। किसान संघ थोड़ा और आक्रामक है।
बयान जारी कर किसान संघ के महामंत्री बद्रीनारायण चौधरी ने खासकर पशुपालन में एफडीआइ का विरोध किया। उन्होंने कहा कि विदेशी निवेश के माध्यम से रोजगार बढ़ने की संभावनाएं कभी भी पूरी नहीं होती है। बल्कि बेरोजगारी और बढ़ेगी। विदेशी निवेश जितनी मात्रा में आता है, उससे अधिक धन देश के बाहर जाता है। पशुपालन, मत्स्य पालन जैसे क्षेत्रों में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश यहां के किसान-मजदूर वगरें का शोषण ही बढ़ाने वाला सिद्ध होगा। प्रतिस्पर्धा में टिकना असंभव होगा, फलस्वरूप विदेशियों की नौकरी करने को बाध्य होंगे।
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