बिहार में शराबबंदी के बाद पड़ोसी देश नेपाल बिहार के पर्यटकों की पहली पसंद बनने लगा है। नेपाल से भारत की सीमा खुली है और आने-जाने में किसी औपचारिकता की भी जरूरत नहीं होती है।
अररिया [आशुतोष कुमार निराला]। बिहार में शराबबंदी के बाद राज्य के सैलानियों को नेपाल भाने लगा है। दरअसल, ये लिकर टूरिस्ट हैं, जिनकी संख्या एकाएक बढ़ गई है। इनमें अधिकांश लोग आसपास के जिलों के होते हैं, जो जोगबनी के रास्ते सीमा पार कर नेपाल जाते हैं और दो-तीन दिनों की सैर कर लौट आते हैं।
यात्रा का मुख्य उद्देश्य मद्यपान ही होता है। भारत-नेपाल के बीच खुली सीमा की वजह न तो वीजा की जरूरत पड़ती है और न ही अन्य कोई रोक-टोक।
शनिवार व रविवार होते खास दिन
शनिवार व रविवार का दिन शराब के शौकीनों के लिए खास होता है। इस दिन अररिया के व्यापारी अपनी दुकानें बंद रखते हैं। शनिवार को यहां से शाम के चार बजे के बाद नेपाल की ओर रुख करते हैं और वहां पूरी रात जमकर शराब पीते हैं। रात को होटल में ठहरते है।
दूसरे दिन शाम तक वापस लौट आते हैं। लौटते समय इस बात का ध्यान रखा जाता है कि शराब पीने की पुष्टि करनी वाली ब्रेथ एनालाइजर मशीन से पकड़े न जाएं।
युवा हैं इसमें ज्यादा सक्रिय
नेपाल जाने वालों में पूर्णिया, नवगछिया, भागलपुर आदि जिलों के युवा उद्यमी, नौकरीपेशा व ठेकेदारी का काम करने वाले लोग होते हैं। ऐसे लोग चार-पांच की संख्या में एक साथ भाड़े की गाड़ी या फिर अपनी कार लेकर जोगबनी बॉर्डर पार करते हैं और चुंगी पर्ची कटाकर एक रात वहां व्यतीत करते हैं। ऐसे लोग विराटनगर, भटेटार आदि जगहों पर रात व्यतीत करते हैं।
चाय-पान की दुकान पर भी उपलब्ध है बीयर
नेपाल में प्रवेश करते ही शराब व बीयर चाय-पान की दुकान पर ही उपलब्ध है। इसके साथ-साथ अधिकांश रेस्टोरेंट में शराब की बिक्री होती है। यहां खाना-नाश्ता के साथ शराब व बीयर मिल जाती है। इसके कारण नेपाल में शराब कारोबारियों की चांदी कट रही है। इतना ही नहीं शराबियों को बेहतर व्यवस्था के लिए नेपाल बॉर्डर पर कई दलाल भी सक्रिय हो गए हैं।
होती है नियमित जांच
इस बारे में पूछने पर फारबिसगंज एसडीपीओ अजीत कुमार ने बताया कि जोगबनी बॉर्डर पर नियमित रूप से जांच की जाती है। अगर कोई शराब के नशे में मिलता है तो कार्रवाई होती है। अब तक एक दर्जन से अधिक लोगों को शराब के नशे में नेपाल से वापस आने के दौरान पकड़ा भी गया है
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