अनेक हस्तियों तथा सेना के उच्च पदों पर आसीन दर्जनों अधिकारियों की पाठशाला रहा नैनीताल का प्रतिष्ठित शेरवुड कॉलेज अब प्रतिभाओं के लिए नही बल्कि विवादों की वजह से चर्चा में है।
नैनीताल, [किशोर जोशी]: सदी के महानायक अमिताभ बच्चन, पहले फील्ड मार्शल मानेक शा और प्रसिद्ध अभिनेता कबीर बेदी समेत अनेक हस्तियों तथा सेना के उच्च पदों पर आसीन दर्जनों अधिकारियों की पाठशाला रहा नैनीताल का प्रतिष्ठित शेरवुड कॉलेज अब प्रतिभाओं के लिए नही बल्कि विवादों की वजह से चर्चा में है।
दो साल पहले नेपाल निवासी छात्र शान अहमद की उपचार के दौरान मौत का मामला भारत-नेपाल के दूतावास के मध्य मुद्दा बना तो संसद और प्रधानमंत्री कार्यालय तक मामला पहुंचा।
चर्च ऑफ इंडिया एक्ट के अंतर्गत है पूरा मामला
लखनऊ डायोसिएशन चर्च एसोसिएशन कंपनी एक्ट के अधीन 1924 में मामला पंजीकृत हुआ था। 1927 में चर्च ऑफ इंडिया एक्ट बना और पहली मार्च 1930 को चर्च ऑफ इग्लैंड की भारत में स्थित संपत्ति चर्च ऑफ इंडिया के अधीन आ गई।
बिशप ऑफ लखनऊ चर्च ऑफ इंडिया के संस्थापक सदस्य बने। इसके बॉयलॉज में साफ लिखा है कि शेरवुड कॉलेज का प्रधानाचार्य चर्च ऑफ इंडिया को मानने वाला ही बनेगा। 1970 में कुछ चर्चों का चर्च ऑफ नार्थ इंडिया में विलय हो गया।
बताया जाता है कि बाद में चर्च की संपत्तियां खुर्दबुर्द करने का खेल चला तो कई बिशॅप को जेल जाना पड़ा। 2013 में विनोद मालवीय बनाम मदन लाल-मंगल दास के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया, जिसके पैरा-25 में कहा कि चर्च ऑफ इंडिया को दूसरे चर्चों की संपत्तियों या संस्थाओं पर किसी तरह का वैधानिक अधिकार नही है।
इस आदेश को 2014 में चर्च ऑफ नार्थ इंडिया द्वारा पुनर्विचार याचिका सुप्रीम कोर्ट में दायर की, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया। पंजीकृत मेमोरंडम व प्रबंध समिति के अनुसार शेरवुड कॉलेज को चलाने का अधिकार बिशप ऑफ लखनऊ चर्च ऑफ इंडिया को है। इसमें चर्च ऑफ नार्थ इंडिया का कोई उल्लेख नही है।
Courtesy: jagran.com
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