पानगढि़या समिति ने अपनी सिफारिशों को अंतिम रूप दे दिया है। इसमे चिकित्सा जगत के जाने माने विशेषज्ञ बतौर सदस्य शामिल होंगे
नई दिल्ली (हरिकिशन शर्मा)। देश में डॉक्टरों की कमी दूर करने तथा मेडिकल की पढ़ाई के क्षेत्र में धांधलेबाजी खत्म करने की दिशा में अहम कदम उठाते हुए सरकार मौजूदा मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआइ) को खत्म करके मेडिकल एजुकेशन कमीशन बना सकती है।
यह आयोग पूरी तरह स्वायत्त होगा और देश में चिकित्सा शिक्षा के पाठ्यक्रम से मेडिकल कालेजों को मान्यता देने और डाक्टरों के लिए नियम तय करने का काम करेगा। खास बात यह है कि इसमें चिकित्सा जगत के जाने माने विशेषज्ञ बतौर सदस्य शामिल होंगे।
मेडिकल एजुकेशन कमीशन की स्थापना की सिफारिश नीति आयोग के उपाध्यक्ष अरविंद पानगढि़या की अध्यक्षता वाली उस समिति की है जिसका गठन सरकार ने एमसीआइ के पुनर्गठन (रीस्ट्रक्चरिंग) के लिए किया है। फिलहाल एमसीआइ ही मेडिकल शिक्षा के नियम तय करती है। उसे इंडियन मेडिकल काउंसिल एक्ट 1956 के तहत ये अधिकार प्राप्त हैं।
सूत्रों के अनुसार पानगढि़या समिति ने अपनी सिफारिशों को अंतिम रूप दे दिया है और जल्द ही इन्हें सरकार को सौंप दिया जाएगा। माना जा रहा है कि सरकार कार्यकारी आदेश के माध्यम से मेडिकल एजुकेशन कमीशन की स्थापना कर सकती है।
इसमें तीन विंग होंगे। पहला विंग एक्रीडीशन (मान्यता) देने का काम करेगा जबकि दूसरा मेडिकल शिक्षा के पाठ्यक्रम तैयार और अपडेट करेगा। तीसरा विंग रजिस्ट्रेशन से संबंधित काम देखेगा। विशेष बात यह है कि आयोग में शामिल नामी गिरामी डाक्टरों को प्राइवेट प्रैक्टिस करने की इजाजत भी दी जा सकती है।
उल्लेखनीय है कि सरकार ने पानगढि़या समिति का गठन एमसीआइ के संबंध में संसदीय समिति की सिफारिशों और अदालती मामलों को देखते हुए किया है। विगत में एमसीआइ में भ्रष्टाचार की शिकायतें भी आई हैं। इसलिए सरकार को इसमें बदलाव की जरूरत महसूस हुई।
हालांकि समिति ने इसे पूरी तरह खत्म कर, इसकी जगह नई संस्था बनाने की सिफारिश की है। सूत्रों ने कहा कि चिकित्सा जगत में हो रहे बदलावों को परलक्षित करने के लिए एमसीआइ की जगह एक स्वायत्त आयोग की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
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