Monday, 27 June 2016

ब्रेक्सिट: टाटा को एक दिन में ही हुआ 30 हजार करोड़ का नुकसान


मुंबई। ब्रिटेन के यूरोपीय यूनियन से बाहर निकलने के बाद ब्रिटेन में सबसे ज्यादा निवेशक और कर्मचारी रखने वाली भारतीय कंपनी टाटा को अब दोबारा से व्यापार की समीक्षा करनी होगी। इससे चिंतित निवेशकों ने टाटा ग्रुप की कंपनियों के शेयर में भारतीय बाजार में भारी बिकवाली की है। 
यही वजह रही कि शुक्रवार को जब ब्रिटेन ने यूरोपीय यूनियन से अलग होने का फैसला किया तो टाटा मोटर्स, टाटा स्टील और टीसीएस के शेयर क्रमश: 8 फीसदी, 6 फीसदी और 3 फीसदी की दर से गिरे। इस वजह से टाटा ग्रुप के मार्केट कैपिटालाइजेशन में एक दिन में 30,000 करोड़ रुपए की कमी आई है। 
नमक से लेकर सॉफ्टवेयर क्षेत्र में कार्यरत टाटा ग्रुप की वर्तमान में 19 कंपनियां ब्रिटेन में काम कर रही हैं, जहां 60,000 से ज्‍यादा कर्मचारी हैं। ब्रिटेन में ग्रुप की ऑटोमोटिव यूनिट जगुआर लैंड रोवर (जेएलआर) को अगले चार साल में 1.47 अरब डॉलर का झटका लगेगा, क्‍योंकि इसे यूरोपियन यूनियन के देशों में बिक्री करने के लिए अपने वाहनों पर 10 फीसदी टैक्‍स और 4 फीसदी टैक्‍स पुर्जों के आयात पर देना होगा। टाटा स्टील को भी सरकार के बदलने से काफी नुकसान होगा।
हालांकि डेविड कैमरून सराकर ने बेलिगुरिड यूनिट के 25 फीसदी स्टेक को खरीदने के लिए हामी भर दी है साथ ही कंपनी को कई मिलियन पाउंड की सहायता देने का भी प्रस्ताव दिया है। आपको बता दें कि भारतीय समूह ने साल 1907 में ब्रिटेन में कारोबार की शुरूआत की थी और साल 2000 तक टाटा ने ब्रिटेन में स्टील, ऑटोमोबाइल, होटल जैसे कई कारोबार में अपनी मजबूत पकड़ बना ली। इस वक्त टाटा ग्रुप 109 बिलियन डॉलर का है।
भारतीय मूल के लोगों को नौकरी जाने का डरयूरोपियन यूनियन से ब्रिटेन के अलग होने से वहां काम कर रहे भारतीय मूल के लोगों में नौकरी जाने का डर मंडराने लगा है। हालांकि ब्रेक्जिट की वजह से कुशल लोगों के माइग्रेशन की संभावना भी बढ़ी है, इससे यूरोपियन माइग्रेंट्स की संख्या ब्रिटेन में बढ़ेगी, जिसकी वजह से प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और इस कारण से ब्रिटेन में भारतीय लोगों को नौकरी मिलने में दिक्कत हो सकती है।
आईटी सेक्टर पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असरब्रिटेन के ईयू से बाहर निकलने से भारत के आईटी सेक्टर पर सबसे ज्यादा असर पड़ेगा, क्योंकि अब इन कंपनियों को ब्रिटेन और यूरोप दोनों जगह अलग-अलग मुख्यालय स्थापित करने होंगे। इस वजह से इन कंपनियों पर कर्मचारियों के खर्च का बोझ बढ़ जाएगा। 100 अरब डॉलर (6.70 लाख करोड़ रुपए) ग्लोबल एक्सपोर्ट वाले भारतीय आईटी सेक्टर में ब्रिटेन की हिस्सेदारी 17 फीसदी है।

Courtesy: patrika.com

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