Tuesday, 21 June 2016

पॉलिसी की वजह से बेरोजगार हुआ डॉक्टर, HC में केंद्र सरकार के खिलाफ केस

सुनील के वकील ने हॉईकोर्ट में एक और याचिका दायर कर अपील की है कि औरंगाबाद बेंच में लंबित एनओआरआई के एक दूसरे मामले को भी इसी मामले के साथ जोड़ दिया जाए।

मुंबई। केंद्रीय स्वास्थ मंत्रालय द्वारा विदेशों में काम करने वाले डॉक्टरों के लिए पॉलिसी में बदलाव करने की वजह से अमेरिकी यूनिवर्सिटी में रिसर्च साइंटिस के तौर पर वाले एक स्कॉलर को भारत लौटना पड़ा है। डॉक्टर सुनील नूथी को अमेरिका में रहते हुए करीब साढ़े तीन साल ही हुए थे कि उन्हें नई नीति की वजह से भारत लौटने पर मजबूर होना पड़ा है और अब वो बेरोजगार भी हो गए हैं।

डॉ.नूथी ने इसके लिए केंद्र सराकर और स्वास्थ मंत्रालय को जिम्मेदार ठहराते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट में इस फैसले के खिलाफ अपील की है क्योंकि इस पॉलिसी के बाद ही उन्हें नो ऑब्लिगेशन टू रिटर्न टू इंडिया सर्टिफिकेट नहीं मिल पाया।

बॉम्बे हाईकोर्ट में भी इस तरह का ये पहला मामला है जिसमें भारत में मेडिकल करने वाले सुनील नूथी जोकि अमेरिका में प्रैक्टिस भी नहीं कर रहे थे फिर भी उन्हें नॉन इमिग्रेंट वीजा के लिए क्लियरेंस नहीं दिया गया।

बॉम्बे हाईकोर्ट ने इस मामले पर सुनवाई के लिए गुरूवार का समय तय किया है। सुनील के वकील ने हॉईकोर्ट में एक और याचिका दायर कर अपील की है कि औरंगाबाद बेंच में लंबित एनओआरआई के एक दूसरे मामले को भी इसी मामले के साथ जोड़ दिया जाए। आपको बता दें कि सेंट्रल महाराष्ट्र एसोसिएशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स के प्रमुख डॉ नारंग मुंडाडा ने अप्रैल 2014 में लागू की गई एनओआरआई पॉलिसी को औरंगाबाद कोर्ट में चुनौती दी थी। अपनी याचिका में उन्होंने कहा था कि सरकार के इस फैसले से अमेरिका में रह रहे करीब 40000 डॉक्टरों की जीविका प्रभावित होगी

No comments:

Post a Comment