Thursday, 23 June 2016

अब नहीं होगा जमीन विवाद, भारत की जमीन के हरेक इंच की होगी ‘जियो-टैगिंग’

अब कोई किसी की जमीन नहीं हथिया सकता और न ही किसी जमीन पर धोखेबाजी कर सकता है क्‍योंकि डिजिटल इंडिया प्रोग्राम के तहत सरकार भारत के सभी जमीनों का जियो-टैगिंग करने जा रही है।

नई दिल्ली। यदि आपको खोसला का घोंसला फिल्म डराती है या फिर आपके प्लॉट को हड़पने वाले कई बेइमानों की वजह से आपकी नींद उड़ी है तो आपके लिए एक अच्छी खबर है।

नरेंद्र मोदी सरकार अब प्रत्येक प्रापर्टी का जियो टैगिंग करने की योजना बना रही है ताकि कौन सा जमीन किसका है ये स्प्ष्ट हो सके।

भारत की पृथ्वी का प्रत्येक स्क्वायर इंच अब डिजिटल तौर पर मैप किया जाएगा, इसके लिए इसरो के हाइ रेज्योलूशन सैटेलाइट इमेजरी, जीपीएस और जीआइएस टेक्नोलॉजी का उपयोग किया जाएगा। लांगीच्यूड और लैटीच्यूड के आधार पर आपका उचित लोकेशन पता लगा लिया जाएगा।

यह ग्रामीण विकास मंत्रालय के नेशनल लैंड रिकार्ड्स मॉडर्नाइजेशन कार्यक्रम का हिस्सा है। नया सिस्टम डिजिटल हुए जमीन के रिकार्ड को देखेगा। ये अकाउंट आधार कार्ड से लिंक्ड होंगे और इसको असम से दिल्ली तक कहीं भी एक्सेस किया जा सकेगा। इसके लिए डिजिटल हस्ताक्षर की जरूरत होगी जो सुरक्षित तौर पर रखा जाएगा। उम्मीद है कि नया सिस्टम पुराने बेकार के पचड़ों को खत्म कर देगा जैसे किसी का जमीन धोखे से हड़पना, घर बनाते हुए पड़ोसी की थोड़ी सी जमीन ले लेना आदि।

क्यान सरकार के ‘जियो टैगिंग’ प्ला न से जमीनी विवाद नहीं होगा?

गांवों में लेखपाल और पटवारी की भूमिका खत्म हो जाएगी। शहरों में रेवेन्यू ऑफिसर द्वारा घूस लेने के मामले कम हो जाएंगे। ग्रामीण विकास मंत्री, चौधरी बीरेंद्र सिंह ने मेल टुडे से कहा, ‘यह पुराना कार्यक्रम है। लेकिन पहले इसपर धूल पड़ा था। अब प्रधानमंत्री के डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के तहत हम इसे दोबारा अस्तित्व में ला रहे हैं। 2014-15 तक इस स्कीम के लिए राज्यों द्वारा फंडिंग की जा रही थी। जबकि इस वित्तीय वर्ष से केंद्र ने इसकी पूरी जिम्मेदारी ले ली है। इसके लिए मंत्री ने अगले माह बेंगलुरु में सभी रेवेन्यू सचिवों की मीटिंग बुलायी है।

उसने आगे कहा कि नेशनल लैंड रिकार्ड्स मॉडर्नाइजेशन प्रोग्राम चंडीगढ़ में लागू किया जा रहा है। उन्होंने कहा, ‘आपको यह जानकर ताज्जुब होगा कि चंडीगढ़ में हर तीसरी प्रापर्टी पर झगड़ा चल रहा है। यहां के 80,000 से अधिक प्रॉपर्टी पर विवाद है। हम उम्मीद कर रहे हैं कि वित्तिय वर्ष 2017 के अंत तक चंडीगढ़ में सभी जमीनों को डिजिटल कर दिया जाएगा।‘

इस कार्यक्रम की मदद से सरकार की मुश्किलें भी आसान होंगी। कई बड़े प्रोजेक्ट के लिए भूमि अधिग्रहण का काम केवल इसलिए रुका है क्योंकि जमीन की सीमा और उसपर गलतफहमी है।

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