वित्तमंत्री अरुण जेटली ने शनिवार को यहां अपने चीनी समकक्ष लोउ जिवेई से मुलाकात की और दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की। इस बैठक में व्यापक वैश्विक आर्थिक हालात पर चर्चा हुई और दोनों ही नेताओं ने आर्थिक विकास को बढ़ाने के लिए समन्वय स्थापित करने पर सहमति जताई। भारतीय उच्चायोग द्वारा जारी एक बयान में कहा गया है कि इस बैठक में होंगझोउ में होनेवाले जी-20 सम्मलेन और भारत में होनेवाले ब्रिक्स देशों के सम्मेलन पर भी चर्चा की गई।
जेटली ने यह मुलाकात यहां एशिया अवसंरचना निवेश बैंक (एआईआईबी) की सालाना बैठक से अलग की। उनकी आधिकारिक मुलाकात सोमवार को होगी। जेटली चीन के पांच दिवसीय दौरे पर हैं। उन्होंने शनिवार को इसके अलावा अलीबाबा एएनटी एंटरप्राइजेट के अधिकारियों से भी मुलाकात की, जो अलीबाबा समूह की कंपनी है।
इससे पहले शनिवार को एआईआईबी की बैठक में जेटली ने कहा, ‘‘भारत ने एफडीआई (प्रत्यक्ष विदेशी निवेश) में सुधारों का कार्य शुरू किया है और ग्रामीण बुनियादी ढांचे, राष्ट्रीय राजमार्ग, अंर्तदेशीय जलमार्ग, शिपिंग, बिजली क्षेत्र और स्मार्ट सिटी में बड़े पैमाने पर निवेश की पहल की है।’’
जेटली ने आगे कहा, ‘‘वैश्विक आर्थिक हवा के विपरीत रुख के बावजूद भारत ने साल 2015-16 में 7.6 फीसदी की उच्च विकास दर को बरकरार रखा है, जबकि पिछले साल यह 7.2 फीसदी थी।’’
एआईआईबी की भूमिका के बारे उन्होंने कहा, ‘‘एआईआईबी अवसंरचना परियोजनाओं के लिए और किसी देश की जरूरत और वर्तमान विकास बैकों की वित्तीय क्षमता से अधिक की वित्तीय मांग पूरी करने वित्तपोषण मुहैया कराने की अतिरिक्त खिड़की है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘भारत में अवसंरचनाओं में निवेश की काफी मांग है, जो पूरी नहीं हुई है और एआईआईबी के वित्तपोषण से 2-3 अरब डॉलर की परियोजनाएं शहरी विकास (जिसमें स्मार्ट सिटी परियोजना भी शामिल है), ऊर्जा, शहरी यातायात, रेलवे, अंतर्देशीय जलमार्ग और जलापूर्ति के क्षेत्र में शुरू करने की तैयारी कर रहा है।’’
वित्तमंत्री ने भारत की मदद से एआईआईबी के क्षेत्रीय कार्यालय के नई दिल्ली में स्थापित करने का भी प्रस्ताव दिया, ताकि इस संभावित विशाल पोर्टफोलियो का प्रभावी तरीके से दोहन किया जा सके और परियोजना विकास, निगरानी व क्रियान्वयन की प्रक्रिया को गति दी जा सके।
Courtesy: live Hindustan. Com
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