रिजल्ट घोटाले के आरोपी बिहार बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष लालकेश्वर प्रसाद ने एसआइटी को बताया कि कॉलेज की मान्यता देने व टॉपर बनाने के अलावा तीन वर्ष से टेंडर में भी धांधली हो रही थी।
पटना [जेएनएन]। बिहार बोर्ड के रिजल्ट घोटाले में फंसे बिहार बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष लालकेश्वर व उनकी पत्नी गंगा देवी महिला कॉलेज की निलंबित प्राचार्या ऊषा सिन्हा को पुलिस की एसआइटी रिमांड पर लेकर पूछताछ कर रही है। एसआइटी ने उनसे 80 सवाल किए। कई सवालों का गोलमोल जवाब देने वाले लालकेश्वर ने एसआइटी को बताया कि बोर्ड के पूर्व सचिव हरिहर नाथ झा के कहने पर ही वे अधिकांश पेपर पर हस्ताक्षर करते थे।
पूछताछ में पता चला कि मथुरा व कोलकाता में बोर्ड के टेंडर मैनेज करता था। बोर्ड में सिर्फ कॉलेज की मान्यता देने व टॉपर बनाने का खेल नहीं चल रहा था, बल्कि तीन वर्ष से टेंडर में भी धांधली हो रही थी। तीन साल में 12 करोड़ का टेंडर हुआ। इसमें लाखों रुपये कमीशन में बंट गए।
बोर्ड के पूर्व सचिव को एसआइटी का नोटिस
लालकेश्वर के यह कहने के बाद कि वे बोर्ड के सचिव के कहने पर कागजात पर हस्ताक्षर करते थे, एसआइटी ने बोर्ड के पूर्व सचिव को पूछताछ के लिए नोटिस भेजा है। घोटाले की एफआइआर दर्ज करने वाले माध्यमिक शिक्षा निदेशक को भी पूछताछ के लिए बुलाया गया है।
मथुरा और कोलकाता में भी हुई छापेमारी
पूछताछ में यह भी उजागर हुआ कि लालकेश्वर का दामाद विवेक बोर्ड के प्रिंटिंग और उससे जुड़े टेंडर को मथुरा और कोलकाता से मैनेज करता था। बदले में वह 20 फीसद कमीशन लेता था। इसके बाद एसआइटी की टीम मथुरा व कोलकाता गई, जहां कई अहम साक्ष्य मिले हैं।
मथुरा प्रिंटिंग सेंटर के कर्मी और विवेक के बीच मोबाइल पर लगातार बात होती थी। इस बात की पुष्टि सीडीआर में हुई। एसआइटी ने मथुरा प्रिंटिंग सेंटर से टेंडर के पेपर भी जब्त किए हैं, जिसमें उत्तर-पुस्तिका से लेकर परीक्षा से जुड़े अन्य पेपर के टेंडर महंगे दामों में लिए गए हैं।
दूसरी टीम कोलकाता प्रिंटिंग सेंटर पहुंची थी। टीम को कोलकाता से वह साक्ष्य मिला है जिसपर टेंडर के दौरान सेक्रेटरी, डायरेक्टर, चेयरमैन और एक अन्य अधिकारी का हस्ताक्षर है। जांच में यह स्पष्ट हो गया है कि टेंडर में धांधली की जानकारी होने के बाद भी लालकेश्वर और अन्य अधिकारी चुप थे।
12 करोड़ के टेंडर में हुआ खेल
बोर्ड में सिर्फ कॉलेज की मान्यता देने व टॉपर बनाने का खेल नहीं चल रहा था, बल्कि टेंडर में भी तीन वर्ष से धांधली हो रही थी। एसआइटी को जानकारी मिली है कि वर्ष 2014 से वर्ष 2016 के बीच परीक्षा की उत्तर पुस्तिका से लेकर अंक पत्र, पेपर और अन्य काम के लिए करीब 4 करोड़ का टेंडर होता था। तीन साल में 12 करोड़ का टेंडर हुआ। इसमें लाखों रुपये कमीशन में बंट गए।
विकास को मिलते थे 25 हजार
तीन साल पहले छोटा-मोटा कारोबार करने वाला विकास जब से लालकेश्वर का पीए बना, लाखों रुपये कमाने लगा। विकास एजेंट का काम करता था और वह कॉलेजों को मान्यता दिलाने में अहम भूमिका निभाता था। एक कॉलेज को मान्यता के लिए जो चार लाख रुपये मिलते थे। उसमें विकास के खाते में कमीशन के रूप में 25 हजार रुपये जाते थे।
कहा एसएसपी मनु महाराज ने
'लालकेश्वर से पूछताछ के बाद माध्यमिक शिक्षा के निदेशक और बोर्ड के पूर्व सचिव को नोटिस भेजा गया है। दोनों से पूछताछ होगी। मथुरा और कोलकाता से एसआइटी को अहम साक्ष्य मिले हैं, जिन्हें लालकेश्वर और ऊषा सिन्हा के सामने रखकर सवाल पूछे जाएंगे।
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