Wednesday, 22 June 2016

एविएशन में 100% FDI से नई एयरलाइनों और छोटे-मझोले एयरपोर्ट का होगा विकास

विमानन क्षेत्र में सौ फीसद एफडीआइ से रीजनल कनेक्टिविटी स्कीम के तहत छोटे व मझोले शहरों में हवाई अड्डों के विकास और आधुनिकीकरण पर जोर होगा।

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। एविएशन सेक्टर में 100 फीसद एफडीआइ की अनुमति से नई विमानन नीति के अमल का रास्ता खुलेगा। इससे रीजनल कनेक्टिविटी स्कीम के तहत छोटे व मझोले शहरों में हवाई अड्डों के विकास और आधुनिकीकरण के अलावा नई क्षेत्रीय एयरलाइनों के पदार्पण की संभावना है।

सरकार ने सोमवार को ही विमानन क्षेत्र में सौ फीसद प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआइ) की अनुमति दी है। इसके तहत 49 फीसद एफडीआइ बिना किसी सरकारी अनुमति के (ऑटोमेटिक रूट से), जबकि सौ फीसद तक सरकार की अनुमति से लाया जा सकेगा।

अभी तक एयरलाइनों में ऑटोमेटिक रूट से 49 फीसद एफडीआइ की अनुमति थी। अब इसे बढ़ाकर सीधे सौ फीसद कर दिया गया है। इसमें 49 फीसद तक एफडीआइ ऑटोमेटिक रूट से, जबकि उससे अधिक एफडीआइ के लिए सरकार की अनुमति लेनी पड़ेगी।इस फैसले से देश में नई विदेशी एयरलाइनों के प्रवेश का रास्ता खुल गया है। इसका सर्वाधिक लाभ रीजनल कनेक्टिविटी स्कीम को मिलेगा, जिसकी घोषणा हाल ही में नई नागरिक विमानन नीति के तहत की गई है।

हालांकि सरकारी सूत्रों के अनुसार केवल गैर-एविएशन वाली विदेशी कंपनियों को ही भारतीय एयरलाइनों में सौ फीसद एफडीआइ की अनुमति दी जाएगी। जबकि विदेशी एविएशन कंपनियों के भारतीय एयरलाइनों में हिस्सेदारी हासिल करने की अधिकतम सीमा अब भी 49 फीसद ही रहेगी। इसका अर्थ यह हुआ कि किसी भारतीय एयरलाइन को विदेश की एयरलाइन और गैर-एयरलाइन कंपनियां मिलकर खरीद सकती हैं। इसमें 49 फीसद इक्विटी एयरलाइन की, जबकि उससे ऊपर गैर-एविएशन कंपनी की हो सकती है। गैर-एयरलाइन विदेशी कंपनियों में उसी देश के सॉवरेन फंड शामिल हैं, जहां देश की एविएशन फर्म होगी।

एयर इंडिया पर पड़ेगा असर

इसका असर एयर इंडिया पर पड़ेगा। क्योंकि बड़ी पूंजी वाली विदेशी कंपनियां या तो भारत में अपनी नई एयरलाइन खड़ी कर लेंगी अथवा मौजूदा एयरलाइनों का अधिग्रहण कर एयर इंडिया को चुनौती देंगी। एयरलाइनों में आप्रवासी भारतीयों (एनआरआइ) को पहले की तरह सौ फीसद तक एफडीआइ के लिए किसी भी सरकारी मंजूरी की आवश्यकता अब भी नहीं होगी।

एयरपोर्टो का विस्तार व आधुनिकीकरण

इस सौ फीसद एफडीआइ से सरकार ने हाल में घोषित विमानन नीति के तहत रीजनल कनेक्टिविटी स्कीम में छोटे व मझोले शहरों में निष्क्रिय या कम उपयोग वाले एयरपोर्टो के विस्तार व आधुनिकीकरण का मंसूबा भी बांधा है। इसे अमल में लाने की गरज से ही अब मौजूदा (ब्राउनफील्ड) एयरपोर्टो में सौ फीसद तक एफडीआइ के लिए दरवाजे भी खोल दिए गए हैं। इससे विदेशी एयरपोर्ट ऑपरेटर कंपनियां भारत के मौजूदा हवाई अड्डों का आसानी से अधिग्रहण एवं विकास कर सकेंगी। इसका सीधा लाभ एयरपोर्ट अथॉरिटी के अधीन उन साठ छोटे व मझोले एयरपोर्टो को मिलेगा, जो अविकसित या अ‌र्द्धविकसित हैं।

अभी तक हवाई अड्डों में 49 फीसद तक एफडीआइ आटोमेटिक रूट से, जबकि उससे अधिक 74 फीसद तक सरकार की अनुमति से लाने की छूट थी।

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