Friday, 5 February 2016

बनारस: 'इलाज से 7 की आंखों की रोशनी गई'

बनारस: 'इलाज से 7 की आंखों की रोशनी गई'

बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के सर सुन्दर लाल अस्पताल में चिकित्सा के बाद सात लोगों ने आंखों की रोशनी चले जाने के आरोप लगाए हैं.

28 जनवरी को बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के अस्पताल के नेत्र विभाग में हुए इलाज के बाद रविवार को 5 मरीज़ शिकायत लेकर क्षेत्र के लंका थाने पहुंचे.

उन्होंने नेत्र विभाग के एक चिकित्सक पर आरोप लगाया कि लापरवाही के चलते उनके आँखों की रोशनी चली गई.

पुलिस ने पीड़ित मरीज़ों की लंका थाने पर शिकायत ले ली और इस मामले में सीएमओ से मेडिकल रिपोर्ट देने के लिए कहा है.

रविवार को अस्पताल के नेत्र विभाग के बाहर हड़कम्प मचा हुआ था. पांच पीड़ितों के साथ उनके दर्जनों परिजन एक डॉक्टर पर लापरवाही का आरोप लगा रहे थे.

थाने में दी गई शिकायत के मुताबिक़ 28 जनवरी को अस्पताल के ऑपरेशन थिएटर में विनोद सिंह (दिल्ली), आत्माराम (चुनार), हरिहर सिंह (शिवपुर-बनारस), लक्ष्मण शर्मा(बनारस), रामगहन प्रजापति (सोनभद्र), कमला सिंह और जगदीश सिंह की आंखों में दवा डाली गई.

इसके बाद डाॅक्टर ओपीएस मौर्या ने बाहर से 'एवेस्टीन' नामक एक इंजेक्शन मंगवाया जिसकी क़ीमत लगभग 23,500 रुपये है. इस एक वायल से बारी-बारी सभी की आखों में दवा इंजेक्ट की गई.

लंका थाना के थानाध्यक्ष संजीव मिश्रा के मुताबिक़, "आंख़ों की रोशनी खो चुके लोगों ने शिकायत दी है, जिसे मेडिकल जांच के लिए सीएमओ के पास भेज दिया गया है. मेडिकल बोर्ड में आने वाली रिपोर्ट के मुताबिक़ ही मुकदमा दर्ज होगा."

बनारस के सीएमओ डाॅक्टर एमपी चौरसिया ने बीबीसी हिंदी को बताया कि इस पूरे मामले की जांच के लिए एक कमिटी गठित कर ली गई है और एक हफ़्ते में रिपोर्ट पुलिस को सौंप दी जाएगी.

बनारस के लक्ष्मण शर्मा के मुताबिक़ उनकी एक आंख पहले से ख़राब थी और इंजेक्शन के बाद दूसरी आंख की भी रोशनी ख़त्म होती गई. अब कुछ नज़र नहीं आ रहा है.

सोनभद्र के रामगहन ने बताया कि उनको एक आंख में सिर्फ़ जलन की दिक्कत थी, लेकिन इंजेक्शन लगने के बाद अब धुंधला दिखाई पड़ता है.

वहीं पीड़ितों के साथ जुटे परिजनों का तो यहां तक आरोप था कि डॉक्टर खास दुकान से ही दवा या इंजेक्शन मंगाते हैं और इस मामले में भी ऐसा ही हुआ है.

इन आरोपों का खंडन करते हुए डाॅक्टर ओपीएस मौर्या नेबीबीसी हिंदी को बताया, "रेटीना में सूजन की शिकायत पर "एवेस्टीन" नामक इंजेक्शन लगाया जाता है और एक वायल से 20-25 लोगों को दवा दी जाती है. मरीज़ों के परिजन बाहर से इंजेक्शन लाए और फिर यह दवा सभी की एक-एक आंख में इंजेक्ट की गई थी."
शिकायत आने पर जब माइक्रोबायोलाॅजी विभाग से इंजेक्शन की जांच कराई गई तो इसमें अशुद्धता पाई गई.

डाॅ मौर्या ने कहा है कि वे 100 प्रतिशत गारंटी लेते हैं कि सभी मरीज़ों की आंखों की रोशनी एक से डेढ़ महीने में वापस लौट आएगी.

वहीं इस पूरे मामले पर अस्पताल के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डाॅक्टर केके गुप्ता ने बीबीसी हिंदी को बताया कि उनके संज्ञान में मामला आया है. उनके मुताबिक पूरे मामले की जांच होगी और दोषियों को बख़्शा नहीं जाएगा.

वे कहते हैं कि एक साथ 7 लोगों के आंखों की रोशनी जाना इत्तेफाक़ नहीं हो सकता.

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