Friday, 5 February 2016

ऑपरेशन मुस्कान अभियान पड़ा ठंडा, एक माह में 22 युवतियां गायब

ऑपरेशन मुस्कान अभियान पड़ा ठंडा, एक माह में 22 युवतियां गायब

नागपुर। उपराजधानी से एक माह में 22 युवतियां गायब हो गईं। इनके बारे में कुछ पता नहीं चल पाया है। कुछ लोग हर रोज थाने में जाकर अपनी पुत्री के बारे में जानकारी लेते हैं, तो कुछ भगवान भरोसे हैं।

पुलिस के आंकड़ोंं पर नजर डालें तो नागपुर से अमूमन हर वर्ष करीब 2200 से 2500 हजार युवतियां गायब हो जाती हैं। इनमें कुछ परिवारिक कलह के कारण तो कुछ प्रेम िववाह के चक्कर में और कुछ तो ऐशो आराम की जिंदगी जीने के लिए घर से चली जाती हैं। कुछ पीड़ित परिवारों का कहना है कि पुलिस ने ऑपरेशन मुस्कान अभियान चलाया था। इस अभियान के अंतर्गत पुलिस ने वाकई कई परिवारों की मुस्कान लौटा दी थी। पिछले कुछ समय से यह अभियान भी ठप्प पड़ गया है।

पुलिस भी है हैरान
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, नागपुर शहर से 1 से 31 जनवरी 2016 तक 22 युवतियां गायब हो गईं। इनमें से कुछ ऐसी युवतियां हैं, जो अपनी सहेली के घर गईं थी और कुछ कॉलेज जाने के बाद घर वापस ही नहीं लौटीं। पुलिस भी हैरान है कि आखिर ये युवतियां गई कहां? कहते हैं कि थाने में काम का इतना बोझ है कि पुलिस लापता मामले का पता लगाने के लिए समय नहीं निकाल पा रही है। नागपुर शहर में थानों की संख्या 24 हो गई है। हर थाने में औसतन हर रोज 2 से 3 लोगों के लापता होने की शिकायतें पहुंचती हैं। इनमें युवतियों की संख्या अधिक रहती है।

किया गया था पुरस्कृत

अकेले महाराष्ट्र से हर वर्ष करीब 10 हजार युवतियां गायब हो रही हैं। इनमें कम उम्र की लड़कियों का आंकड़ा अधिक है। इन युवतियों को खोज निकालने का प्रमाण बेहद कम है। शासकीय आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2011 से 2015 के दरमियान करीब 4 लाख लोग महाराष्ट्र से गायब हुए। इनमें युवतियों का प्रमाण सर्वाधिक है।

बता दें कि वर्ष 2015 में नागपुर शहर के अपराध पुलिस शाखा के सामाजिक सुरक्षा दस्ते को अपनों से बिछुड़े लोगों की तलाश कर उन्हें उनके अपनों से मिलाने पर पुरस्कृत किया गया था। ऑपरेशन मुस्कान अभियान में नागपुर के सामाजिक सुरक्षा दस्ते का नंबर अव्वल था। उस समय इस विभाग में निरीक्षक बाजीराव पोवार थे। मौजूदा समय में इस विभाग में बाजीराव की जगह दीपक खोब्रागडे जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।

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