सूत्रों का कहना है कि ब्लैकलिस्ट करने की नई मानकों में भारी भरकम जुर्मानों का मिला-जुला खाका होगा।
नई दिल्ली (प्रेट्र)। रक्षा मंत्रालय ने दागी कंपनियों को ब्लैकलिस्ट करने की नई नीति का मसौदा मंजूर कर दिया है। अब यह मामला अटर्नी जनरल के पास जांच के लिए है। कंपनियों को ब्लैकलिस्ट करने की नई नीति ना सिर्फ गलत करने वालों के खिलाफ सख्त होगी बल्कि सशस्त्र सेनाओं के आधुनिकीकरण की योजना को भी प्रभावित नहीं होने देगी।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि संबंधित फाइल को मंजूरी मिल गई है। अब वह कानूनी स्वरूप की जांच के लिए अटर्नी जनरल के पास है। रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर लंबे समय से ब्लैकलिस्ट करने की नई नीति पर काम कर रहे थे। इस सिलसिले में उन्होंने सभी पक्षों के साथ कई बैठकें की हैं। सूत्रों का कहना है कि नई मानकों में भारी भरकम जुर्मानों का मिला-जुला खाका होगा। साथ ही श्रेणीबद्ध तरीके से दोषी कंपनी को ब्लैक लिस्ट किया जाएगा। साथ ही कई और तरह के हर्जाने भी वसूले जाएंगे।
इससे कुछ ही महीने पहले रक्षा मंत्रालय ने रक्षा सौदों में दलालों को शामिल करने के मानक निर्धारित किए हैं। इसके मुताबिक विदेशी रक्षा कंपनियां अब अपने रक्षा उत्पादों को सशस्त्र सेनाओं और सरकार को दिखाने के लिए बाकायदा एजेंट नियुक्त कर सकती हैं। लेकिन इसके भी कड़े नियम बनाए गए हैं और प्रत्येक कंपनी के कारोबार की कड़ी पड़ताल होगी। साथ ही नियुक्त किए गए एजेंट को सफलता बोनस या हर्जाने की फीस नहीं देनी होगी।
Courtesy: jagran. Com
No comments:
Post a Comment