नई दिल्ली। दिल्ली सरकार ने ओला और उबर जैसी ऐप-आधारित टैक्सी सेवाओं के लिए अपनी पॉलिसी तैयार कर ली है, जिसके तहत ऐसी टैक्सी सेवाओं को यात्रा शुरू होने से पहले ही ग्राहक को सब कुछ बताना होगा, ताकि बाद में किसी तरह की शिकायत की गुंजाइश न रहे।
दिल्ली के परिवहन मंत्री सत्येंद्र जैन के मुताबिक, यह पॉलिसी ऐप-आधारित टैक्सी सेवाओं की मनमानी रोकेगी, पॉलिसी लगभग तैयार है और जनता, टैक्सी, ऑटोवालों से सलाह-मशविरे के बाद इसे एलजी के पास मंज़ूरी के लिए भेजा जाएगा। सरकार ने पॉलिसी पर चर्चा के लिए टैक्सी एग्रीगेटर्स (ऑपरेटर्स) और ऑटो संगठनों की मीटिंग बुलाई है।
- जैन ने बताया, टैक्सी में मीटर होना जरूरी है। रेट वो होंगे जो सरकार ने तय किए हैं। एग्रीगेटर्स मनमुताबिक पैसे नहीं बढ़ा सकेंगे।
- ज्यादातर ऐप बेस्ड एग्रीगेटर्स मीटर के बजाय त्रक्कस् मॉडल का यूज करते हैं। हमारी कोशिश है कि मीटर को रेग्युलेट किया जाए।
- जैन ने ये भी बताया कि सरकार ने सेफ्टी बढ़ाने और रेट पर कंट्रोल करने के लिए ही ये पॉलिसी तैयार की है।
- ऐप बेस्ड टैक्सियां आपके साथ गेम खेलती हैं। कभी आपसे ज्यादा तो कभी कम पैसे वसूले जाते हैं। हमने टैरिफ की मैक्सिमम लिमिट तय कर दी है। अब वे इससे ज्यादा नहीं वसूल सकेंगे। किराया इस पर भी डिपेंड करेगा कि कस्टमर ने कौन-सी गाड़ी बुलाई है।
असल में ऐप-आधारित टैक्सी सेवाओं के लिए अभी तक सरकार के पास कोई पॉलिसी नहीं थी, जिसके चलते इन टैक्सी वालों की मनमानी पर कार्रवाई करने जब कोर्ट पहुंचा जाता था, तो कानून के अभाव में आमतौर पर उनकी बात को ही सही मानना पड़ता था, लेकिन इस पॉलिसी के बाद अब सरकार इन टैक्सियों पर नकेल कस पाएगी।
Courtesy: patrika.com
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