वैज्ञानिकों ने बताया कि नई बैट्री व्यावसायिक रूप से उपलब्ध कई हाई-इनर्जी लीथियम-आयन बैट्री के सदृश है।
टोरंटो, प्रेट्र : वैज्ञानिकों ने विटामिन से चलने वाली बैट्री तैयार की है। हाई वोल्टेज से लैस यह बैट्री लंबे समय तक चलेगी। इस आविष्कार ने ऐसे सस्ते कन्ज्यूमर इलेक्ट्रानिक्स उपकरणों का रास्ता तैयार कर दिया है जो पर्यावरण के अनुकूल होंगे।
वैज्ञानिकों ने बताया कि नई बैट्री व्यावसायिक रूप से उपलब्ध कई हाई-इनर्जी लीथियम-आयन बैट्री के सदृश है। नई बैट्री का कैथोड अभी उपलब्ध बैट्री से भिन्न है। विटामिन बी2 के एक कंपाउंड को नई बैट्री में कैथोड के तौर पर इस्तेमाल किया गया है। कैथोड ही बैट्री का वह हिस्सा है जहां बिजली स्टोर होती है। जब डिवाइस को इससे जोड़ा जाता है तो यही हिस्सा बिजली की आपूर्ति करने लगता है।
टोरंटो विश्वविद्यालय के ड्वीघ्ट सेफरॉस ने कहा, 'जटिल अणुओं की तलाश में हम प्रकृति पर निगाह डालते हैं। इन्हीं जटिल अणुओं का इस्तेमाल बेशुमार कन्ज्यूमर इलेक्ट्रानिक्स एप्लीकेशन में किया जा सकता है। यदि आप प्रकृति द्वारा निर्मित जटिल चीज को लेते हैं तो इससे नई सामग्री तैयार करने में थोड़ा ही समय खर्च करना पड़ेगा।'
कैसे काम करती है बैट्री
आधुनिक बैट्री में तीन बुनियादी हिस्से होते हैं। एक पॉजिटिव टर्मिनल, एक निगेटिव टर्मिनल और एक इलेक्ट्रोलाइट सॉल्यूशन। पॉजिटिव टर्मिनल धातु का वह हिस्सा है जो ऊर्जा देने के लिए डिवाइस को छूता है और बैट्री के खोल में स्थित कैथोड से जुड़ जाता है। निगेटिव टर्मिनल बैट्री के बीच में स्थित एनोड से जुड़ जाता है। इलेक्ट्रोलाइट सॉल्यूशन आयन को कैथोड और एनोड के बीच यात्रा करने देता है। बिजली से चलने वाले फोन, कैमरा या अन्य डिवाइस को जब बैट्री के संपर्क में लाया जाता है तब एनोड से इलेक्ट्रान निकल कर इलेक्ट्रोड की तरफ जाता है। इस प्रक्रिया में इलेक्ट्रोलाइट सॉल्यूशन चार्ज को बनाए रखता है।
Courtesy: jagran. Com
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