27 फरवरी, 2002 को गोधरा में साबरमती एक्सप्रेस में 59 कारसेवकों को जिंदा जलाने के बाद गुजरात में दंगे भड़क उठे थे।
जागरण संवाददाता, अहमदाबाद । गोधरा कांड के बाद भड़के गुजरात दंगा मामले में हाई कोर्ट ने 11 आरोपियों को एक व्यक्ति व उसकी बेटी की हत्या का दोषी मानते हुए आजीवन कैद की सजा सुनाई है।
27 फरवरी, 2002 को गोधरा में साबरमती एक्सप्रेस में 59 कारसेवकों को जिंदा जलाने के बाद गुजरात में दंगे भड़क उठे थे। मेहसाणा के आंद्रज गांव में 3 मार्च, 2002 को दंगाई भीड़ ने एक घर पर धावा बोल वहां छिपे मियां सैयद व उसकी पुत्री हसीना बीबी को जिंदा जला दिया था।
14 जून, 2005 को स्थानीय फास्ट ट्रैक कोर्ट ने सभी 27 आरोपियों को बरी कर दिया था। इस फैसले के खिलाफ गुजरात हाईकोर्ट में अपील की गई। इस पर न्यायाधीश अनंत दवे व जज बी एन कारिया की पीठ ने निचली अदालत के फैसले को खारिज करते हुए 11 आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने सभी दोषियों पर दस-दस हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया।
Courtesy: jagran. Com
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