Thursday, 16 June 2016

आरटीआई ने खोली पोल, यहां मात्र 18 फीसद बिल्‍डिंग ही वैध

आरटीआई ने ठाणे स्‍थित भवनों के अवैध निर्माण की पोल खोल दी है जिससे यह बात सामने आयी है कि यहां मात्र 18 फीसद बिल्‍डिंग ही वैध हैं।

ठाणे(मुंबई)। मुंबई स्थित ठाणे में बने बिल्डिंग में से मात्र 18 फीसद वैध हैं यानि बाकि के 82 फीसद घर व कामर्शियल यूनिट पूरी तरह से विकास नियंत्रण नियमों का उल्लंघन करते हैं।

टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार, एक्टिविस्ट दयानंद नेने ने जब इस बाबत आरटीआई फाइल किया तब जाकर इतना बड़ा खुलासा हुआ है। ठाणे नगर निगम (टीएमसी) के प्रॉपर्टी टैक्स डिपार्टमेंट ने यह खुलासा किया। टीएमसी ने इस बात को स्वीकारा कि 31 मार्च 2,016 तक 1.7 लाख कामर्शियल और रेसिडेंशियल में से मात्र 18 फीसद ही वैध बिल्डिंग हैं।

इस आंकड़े से यह भी पता चला कि इस तरह के अवैध भवनों की संख्या पिछले चार सालों में अधिक बढ़ी है। नेने ने कहा, यह आंकड़ा इस ओर भी इशारा कर रहा है कि प्रशासन किस कदर भूमाफियाओं के साथ मिलकर काम कर रहा है। 2012 में यह अनुपात 79 फीसद था जो 2016 में 82 फीसद हो गया है। 2012 में कुल 1.55 लाख में अवैध रूप से बने भवनों की संख्या 1.2 लाख थी अब चार सालों में इसमें 1.4 लाख की बढ़त हुई।

2016 में नेने ने कहा, अवैध रूप से बने बिल्डिंग अधिकांशत: लोकमान्य नगर, वागले स्टेट, कलवा और रैलादेवी क्षेत्रों में हैं। टीएमसी को इन अवैध निर्माणों से प्रॉपर्टी टैक्स के रूप में अच्छा रेवेन्यू मिला है, जिससे सामूहिक तौर पर 2015-16 के दौरान कुल 345.9 करोड़ से 283.9 करोड़ की आमदनी यहीं से हुई। केवल 62 करोड़ वैध निर्माणों से मिले हैं। हाल के एक सवाल से टीएमसी ने यह खुलासा किया कि 14 सालों में अवैध निर्माणों को नष्ट करने में कर दाताओं के 20 करोड़ रुपये खर्च हुए।

टीएमसी के साथ काम कर रहे एक आर्किटेक्ट ने दावा किया कि अब तक बिना उचित अप्रूवल के ही डेवलपर्स को प्रोजेक्ट शुरु करने को प्रोत्साहित किया जाता रहा है। डेवलपर्स अपना प्रोजेक्ट बनाना शुरू कर देते हैं और अंत में उन्हें मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।

नेने ने कहा कि वह इस पूरे सिस्टम का पर्दाफाश करना चाहते हैं ताकि आगामी निकाय चुनावों में जब यहां के नागरिक वोट डालें तो अपना जिम्मेदारी वाला निर्णय ले सकें।

इसके अलावा नेने ने टीएमसी के काम करने के रवैये की जांच के लिए मुख्यमंत्री से अपील किया है।

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