EDI बिल्डिंग में फंसा था आतंकी सल्लाहुद्दीन का बेटा, सुरक्षाबलों ने बचाया

श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर के पंपोर हमले में मारे गए आतंकियों को श्रदांजलि देने और भविष्यि में ऐसे ही हमलों की चेतावनी देने वाले यूनाईटेड जेहाद कौंसिल के चेयरमैन सल्लागहुदीन का छोटा बेटा भी उस वक्त ईडीआई बिल्डिंग में ही मौजूद था जिस समय आतंकी सीआरपीएफ काफिले को निशाना बनाने के बाद ईडीआई बिल्डिंग में छुपने आए थे। उसे उन सुरक्षाकर्मियों ने अपनी जान पर खेल कर सुरक्षित बाहर निकाला, जिनकी मौत पर सल्लाीहुदीन अपने आतंकी कैडर की पीठ ठोंक रहा है।
गौरतलब है कि पिछले शनिवार को लश्कर-ए-तईबा के तीन आत्मघाती आतंकी श्रीनगर-जम्मू राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित सेमपोरा-पंपोर में सीआरपीएफ के एक वाहन पर हमला करने के बाद पास के ईडीआई परिसर में दाखिल हो गए थे। आतंकियों ने ईडीआई परिसर में पनाह ली और वहीं से वो लगातार सुरक्षाबलों पर गोलियां बरसा रहे थे।
यह मुठभेड़ पिछले सोमवार की देर शाम समाप्त हो गई थी। इसमें सेना के दो कैप्टेन, एक हवालदार और दो सीआरपीएफ जवान के अलावा एक नागरिक भी मारा गया। तीन आतंकी भी मारे गए।
अलबत्ताफ, जिस समय आतंकी ईडीआई परिसर में दाखिल हुए थे, उस समय वहां पर 160 से ज्यादा लोग थे। इन लोगों में कश्मीर के सबसे बड़े आतंकी संगठन और यूनाईटेड जेहाद काउंसिल के चेयरमैन सैय्यद सल्लाहउद्दीन का बेटा सैय्यद मुईद युसुफ भी था। वह ईडीआई में बतौर प्रबंधक सूचना प्रौद्योगिकी काम करता है।
जब आतंकी परिसर में दाखिल हुए तो उस समय वह पहली मंजिल पर अस्सयर (शाम के समय) की नमाज अदा कर रहा था। आतंकियों के दाखिल होने पर वहां अफरा-तफरी मच गई थी। लोग अपनी जान बचाने को इधर उधर भागने लगे थे। जिहाद कौंसिल के चेयरमैन के बेटे सैय्यद मुईद युसूफ ने नमाज को बीच में ही छोड़ दिया और वह भी वहां से अन्य लोगों संग जान बचाने के लिए निकला। पहली मंजिल पर 23 लोग थे।
आतंकियों ने राइफलें लहराते हुए उन सभी को अपने मोबाइल फोन नीचे रखने का निर्देश देते हुए हाथ ऊपर उठाकर बाहर निकलने को कहा ताकि सुरक्षाकर्मी उन्हें आतंकी न समझे। आतंकी कह रहे थे निकलो जल्दी, निकलो जल्दी, फौज आ रही है, मुठभेड़ शुरु होने वाली है, हमें आप लोगों से कुछ नहीं है। हमारी जंग फौज के साथ ही है।
आतंकियों के फरमान पर ये सभी 23 लोग पहली मंजिल से नीचे आए और पिछले दरवाजे से हॉस्टल की तरफ गए, जहां अगले चंद मिनटों में राज्य पुलिस और सीआरपीएफ के जवान पहुंच गए। उन्होंने पूरे परिसर को घेर लिया।
मुख्य परिसर में छिपे आतंकियों ने उन पर गोलियां बरसानी शुरु कर दी। लेकिन सुरक्षाकर्मियों ने गोलियों की परवाह किए बिना लोगों को निकालने का अभियान शुरु कर दिया।
सैय्यद मुईद उन कर्मियों में शामिल था, जिन्हें सुरक्षाबलों ने सबसे पहले बख्तरबंद वाहन में सवार होने को कहा था। लेकिन उसने और उसके कुछ अन्य साथियों ने सुरक्षाकर्मियों से कहा कि वह बाद में आएंगे, पहले महिलाकर्मियों के अलावा उनके कुछ जूनियर को निकाला जाए। इसी दौरान आतंकयों ने मुख्य परिसर में बनी कैंटीन से उनकी तरफ अंधांधुंध फायरिंग की, जिसमें माली अब्दुल गनी मीर जख्मी हो गया। इस फायरिंग में सीआरपीएफ के चार जवान भी जख्मी हुए थे।
इसके बाद सुरक्षाबलों ने वहां कुछ और बख्तारबंद वाहन मंगवाए जिनमें सल्लाहउदीन के बेटे के साथ अन्य लोगों को भी बैठाकर सुरक्षित बाहर निकाला गया। घायल अब्दुल गनी मीर को एक अन्य वाहन में वहां से अस्पताल पहुंचाया गया जहां वे अपने जख्मों की ताव ना सहते हुए चल बसा।
आईजीपी कश्मीर एसजेएम गिलानी ने भी ईडीआई परिसर में आतंकी हमले के समय मोस्ट वांटेड आतंकियों की सूची में शामिल सल्लाहुदीन के पुत्र के फंसे होने की पुष्टि करते हुए कहा कि वह वहां बतौर इंजीनियर काम करता है। हमनें आतंकियों के खिलाफ अभियान शुरु करने से पहले उसे भी अन्य लोगों के साथ सुरक्षित बाहर निकाला है।
निदेशक ईडीआई मोहम्मद इस्माइल पर्रे ने भी स्वीकार किया है कि सुरक्षाबलों द्वारा आतंकियों की गोलियों की बौछार में निकाले गए 160 लोगों में सैययद मुईद भी शामिल था।
हालांकि, इस संदर्भ में जब सय्यद मुईद से संपर्क करने का प्रयास किया गया तो वह उपलब्ध नहीं हो पाया।