Saturday, 10 June 2017

पादरी और नन को भी संपत्ति का अधिकार: केरल हाईकोर्ट

कोच्चि, प्रेट्र। केरल हाई कोर्ट ने अपने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि नन या पादरी बनने वालों को संपत्ति के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता है। हाई कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को पलटते हुए यह व्यवस्था दी है। इस दौरान कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 300-ए (संपत्ति का अधिकार) का भी हवाला दिया।

जस्टिस वी. चितांब्रेश और जस्टिस के. रामकृष्णन की खंडपीठ ने पादरी या नन बनने वालों को उत्तराधिकार से वंचित करने पर आश्चर्य व्यक्त किया। पीठ ने कहा कि नन या पादरी जब वेतन पर नौकरी कर सकते हैं या एक वकील के तौर पर फीस ले सकते हैं तो ऐसे में उन्हें पैतृक संपत्ति से बेदखल कैसे किया जा सकता है। एक पादरी ने निचली अदालत के फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी।

कोर्ट ने पादरी को पूर्वजों की संपत्ति में अधिकार के दावे को ठुकरा दिया था। हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि नन या पादरी को संपत्ति से वंचित करने का कानूनी प्रावधान या सामाजिक रिवाज नहीं है। धार्मिक प्रक्रिया में शामिल होने मात्र से ही किसी को उसके अधिकारों से वंचित करना अनुच्छेद 300-ए का सरासर उल्लंघन है। संन्यासियों या पादरियों द्वारा स्वेच्छा से अपनी संपत्ति मठ या चर्च को दान करने का रिवाज है, लेकिन इस आधार पर वसीयतनामे के जरिये उन्हें संपत्ति से वंचित करने का प्रावधान नहीं है।

Source:jagran.com

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