नई दिल्ली, प्रेट्र। अरहर की दाल का भरपूर स्टॉक होने के चलते खाद्य और उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने मानव संसाधन विकास मंत्रालय (एचआरडी) से संपर्क साधा, ताकि मिड डे मील (एमडीएम) और कालेजों के हॉस्टल मेस के मेन्यू में अरहर दाल को शामिल किया जा सके। लेकिन जब इसकी कवायद शुरू हुई तो खाद्य मंत्रालय ने खुद ही हाथ पीछे खींच लिये।
वैसे मानव संसाधन विकास मंत्रालय का मानना है कि देश भर के हॉस्टल मेस में वह खाने के चयन पर फरमान जारी नहीं कर सकते। खासकर तब जब मिड डे मील में अरहर दाल को शामिल करने से प्रति छात्र पर पड़ने वाली लागत खासी बढ़ जाएगी। दरअसल केंद्र सरकार ने इस साल अरहर दाल के उत्पादन पर सतर्कता बरती है। चूंकि पिछले साल इसकी कीमतें 180 रुपये प्रति किलो तक बढ़ गई थीं। लिहाजा, मुनाफाखोर फिर अरहर दाल का स्टॉक रखकर कीमतें बढ़ाने का काम न करें, इसके लिए सरकार ने अपनी संरक्षक एजेंसियों को इस साल अरहर दाल का स्टॉक जमा करने को कहा है। ताकि मुनाफाखोर दाल की जमाखोरी करके उसकी कीमतें न बढ़ाने पाएं।
हालांकि अरहर की दाल का अतिरिक्त स्टॉक होने से उसकी कीमतें इस साल गिरकर 50 रुपये प्रति किलो से 70 रुपये किलो तक रह गई हैं। मानव संसाधन विकास मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि खाद्य और उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने अरहर दाल को स्कूलों में मिड डे मील और कालेजों में हॉस्टल मेस के मेन्यू में शामिल किया जाए। लेकिन इस प्रस्ताव को उपयुक्त नहीं पाया गया है। उच्च शिक्षा अधिकारियों ने हाल में हुई एक बैठक में बताया कि हॉस्टल मेस का मेन्यू खुद छात्र तय करते हैं। इसमें सरकार दखल नहीं दे सकती। स्कूल के शिक्षा अधिकारियों ने भी मिड डे मील में बच्चों को अरहर दाल दे पाने में असमर्थता जताई है।
Source:jagran.com
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