Monday, 19 June 2017

चिकनगुनिया की वैक्सीन तैयार, प्रयोग के लिए नहीं मिल रहे लोग

नई दिल्ली, प्रेट्र। चिकनगुनिया पर लगाम कसने के लिए विश्व में कोई कारगर दवा विकसित नहीं हो सकी है। पहली बार भारत की लैब ने इसे तैयार किया है, लेकिन त्रासदी यह है कि प्रयोग पहले चरण में आकर रुक गया है। हैदराबाद की भारत बायोटेक को अब वैक्सीन का प्रयोग मानव पर करना है। इसके लिए उसे 60 स्वस्थ व्यक्तियों की जरूरत है, लेकिन अभी तक मिल सके हैं केवल दस फीसद।

चिकनगुनिया का कहर बीते साल कहर बनकर टूटा था। 64 हजार लोग इसके शिकार बने थे, लेकिन यह वह आंकड़ा है जो रिकार्ड में आया। सरकार खुद मानती है कि इसके पीडि़त वास्तविकता में दस गुना ज्यादा थे। इस बार इसमें और ज्यादा इजाफा होने की उम्मीद है। भारत बायोटेक का प्रयोग निर्बाध गति से चलता रहता तो भारत इस संक्रमित रोग पर लगाम कसने की दिशा में एक उपलब्धि कायम कर सकता था। 2017 में अभी तक मानसून का पता नहीं है और सात हजार मरीज इस संक्रामक रोग के विभिन्न अस्पतालों में भर्ती हो चुके हैं। आंकड़ा और बढ़ने की आशंका है।

भारत बायोटेक के चेयरमैन डॉ. कृष्णा एला का कहना है कि पहले फेज का ट्रायल यह बताएगा कि दवा कितनी सुरक्षित व कारगर है। उन्होंने इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च व केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय से अपील की है कि तत्काल हस्तक्षेप करके उनकी मदद की जाए। जरूरत 60 स्वस्थ लोगों की है पर अभी तक दस फीसद को तैयार किया जा सका है। उनका कहना है कि अब दवा का प्रयोग इन लोगों पर किया जाना है। इसके लिए चयनित किए गए सभी व्यक्तियों को आइसीयू (गहन चिकित्सा कक्ष) में रखा जाता है। डॉ. एला का कहना है कि आइसीयू में रखे जाने की बात से ही युवक कतरा रहे हैं, क्योंकि वहां पर ज्यादातर कमजोर पर गंभीर बीमार लोग दाखिल होते हैं। उनका कहना है कि अमेरिका में यह प्रयोग करना होता तो केवल चार माह में पूरा हो जाता, लेकिन भारत में यह प्रक्रिया बहुत ज्यादा समय ले रही है।

उल्लेखनीय है कि भारत बायोटेक रोटा वायरस को काबू करने की दवा बना चुका है। इससे डायरिया का संक्रमण होता है और पूरा विश्व में कोई भी डायरिया से लड़ने की वैक्सीन तैयार नहीं कर पाया था। डब्ल्यूएचओ का खुद मानना है कि विश्व में हर तीसरे बच्चे को डायरिया से बचने के लिए जो दवा दी जा रही है वह भारत में ही तैयार की गई है।

Source:jagran.com

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