इंफोसिस ने कर्मचारियों की वेतनवृद्धि जुलाई तक के लिए तथा वरिष्ठ कार्यकारियों के लिए उसके भी बाद तक के लिए टाल दी है क्योंकि वह अनिश्चित माहौल तथा अमेरिका जैसे अहम बजारों में वीजा संबंधी मुद्दों से निबटने में लगी है. वैसे देश की दूसरी सबसे बड़ी सॉफ्टवेयर सेवा कंपनी अप्रैल से वेतनवृद्धि करती है लेकिन इस साल वेतनवृद्धि अगली तिमाही के लिए टाल दी गयी है. इंफोसिस में दो लाख से अधिक कर्मचारी हैं.
नई दिल्ली: इंफोसिस ने कर्मचारियों की वेतनवृद्धि जुलाई तक के लिए तथा वरिष्ठ कार्यकारियों के लिए उसके भी बाद तक के लिए टाल दी है क्योंकि वह अनिश्चित माहौल तथा अमेरिका जैसे अहम बजारों में वीजा संबंधी मुद्दों से निबटने में लगी है. वैसे देश की दूसरी सबसे बड़ी सॉफ्टवेयर सेवा कंपनी अप्रैल से वेतनवृद्धि करती है लेकिन इस साल वेतनवृद्धि अगली तिमाही के लिए टाल दी गयी है. इंफोसिस में दो लाख से अधिक कर्मचारी हैं.
कर्मचारियों को भेजे ई-मेल में इंफोसिस के मुख्य परिचालन अधिकारी यू बी प्रवीण राव ने कहा कि रैंक जेएल 5 (जॉब लेवल पांच) और उसके नीचे के कर्मचारियों के लिए वेतन वृद्धि जुलाई में होगी. अन्य कर्मचारियों के लिए यह उसक बाद की तिमाही में होगी. उन्होंने संभावित छंटनी को लेकर कर्मचारियों की आशंका भी दूर करने की कोशिश की, लेकिन यह भी कहा कि प्रदर्शन के आधार कुछ छंटनी होगी जैसा कि पहले हो चुका है. जब इस संबंध में संपर्क किया गया तो इंफोसिस प्रवक्ता ने इसकी पुष्टि की.
यह फैसला ऐसे वक्त आया है जब उद्योगजगत में छंटनियों की खबर आ रही है. वैसे ज्यादातर कंपनियों ने छंटनी को प्रदर्शन के मुद्दे से जोड़ा है लेकिन कई लोगों का मानना है कि ये कदम लागत नियंत्रित करने के मकसद से उठाए जा रहे हैं.
कॉग्निजेंट ने अपने निदेशकों, सहायक उपाध्यक्षों और वरिष्ठ उपाध्यक्षों को छह से नौ महीने की तनख्वाह लेकर स्वेच्छा से कंपनी छोड़ने को कहा है. समझा जाता है विप्रो ने अपने वाषिर्क मूल्यांकन के तहत करीब 600 कर्मचारियों को नौकरी छोड़ने को कहा है. वैसे अटकलें हैं कि इनकी संख्या 2000 तक जा सकती है. हालांकि इंफोसिस वेतनवृद्धि टालने वाली अकेली कंपनी नहीं है. टेक महिंद्रा ने छह साल से अधिक के अनुभव वाले कर्मचारियों के वेतन की अबतक समीक्षा नहीं की है.
भारतीय आईटी कंपनियां अनिश्चित माहौल और अमेरिका, सिंगापुर, आस्ट्रेलिया एवं न्यूजीलैंड जैसे देशों में कड़े वर्क परमिट व्यवस्था के चलते गहरे दबाव से गुजर रही हैं. भारतीय आईटी कंपनियों को अपने राजस्व का एक बड़ा हिस्सा उत्तरी अमेरिका बाजार से मिलता है, वे अब स्थानीय लोगों की भर्ती कर रही हैं क्योंकि अमेरिका सरकार ने कार्य वीजा नियम को और कड़ा बनाने की दिशा में है. इंफोसिस ने अगले दो सालों में 10,000 अमेरिकी कर्मचारी नियुक्त करने की योजना बनायी है.
Source:zeenews.com
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