नई दिल्ली, [स्पेशल डेस्क]। टेक्नोलॉजी के युग में एक तरफ जहां लोग हाईटेक हो गए है तो वहीं दूसरी तरफ लोग टेक्नोलॉजी से हो रही अपराध की गिरफ्त में भी आसानी से फंस रहे हैं। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (एनसीआरबी) की तरफ से 2016 में जारी की गई रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2015 में साइबर अपराध के देशभर कुल 11,592 मामले दर्ज किए गए थे।
इस रिपोर्ट में, वित्तीय फर्जीवाड़े से लेकर महिलाओं के खिलाफ हुए अपराध भी शामिल है। जाहिर सी बात है कि एनसीआरबी ने यह वो आंकड़े दिए हैं जिन्हें लोगों ने दर्ज कराया है जबकि कई मामले ऐसे होंगे जिन्हें लोगों ने दर्ज ही नहीं कराया होगा।
दो महीने में 39 सरकारी वेबसाइट हैक
इस साल 12 फरवरी को जब गृह मंत्रालय की वेबसाइट हैक करने की ख़बर आयी उसके बाद अधिकारी फौरन हरकत में आए। हालांकि, अधिकारियों ने वेबसाइट हैकिंग की ख़बर को बेबुनियाद करार दिया लेकिन मंत्रालय के आंकड़े इस बात की तस्दीक करते है कि सिर्फ 2017 के जनवरी और फरवरी में ही 39 सरकारी वेबसाइट हैक की गई। जिसके बाद सरकार को साइबर अपराध से निपटने के लिए एक्सपर्ट ग्रुप बनाने पर बाध्य होना पड़ा।
सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अनुसार, साल 2014 में जहां केन्द्र और राज्य सरकार की 155 वेबसाइट्स हैक करने के मामले सामने आए तो वहीं अगले साल 2015 में यह मामले बढञकर 164 और पिछले साल यह आंकड़ा बढ़कर 199 हो गया।
साइबर अपराध में अव्वल है यूपी
साल 2015 में साइबर क्राइम के सबसे ज्यादा 2,208 मामले उत्तर प्रदेश में दर्ज किए गए और उसके बाद दूसरे स्थान पर रहा महाराष्ट्र जहां 2,195 केस रजिस्टर किए गए। 2016 में एनसीआरबी की तरफ से साल 2015 में दर्ज किए गए साइबर अपराध के जो आंकड़े जारी किए गए उसके मुताबिक भारत में साइबर अपराध के कुल 8,121 मामले दर्ज किए गए। इनमें 8,121 गिरफ्तारियां हुई।
साइबर क्राइम पर साइबर एक्सपर्ट की राय
तेजी से बढ़ते साइबर अपराध ने देश के पुलिस के सामने एक बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। साइबर एक्सपर्ट पवन दुग्गल ने जागरण डॉट कॉम से बात करते हुए कहा कि आठ नवंबर को हुई नोटबंद के बाद साइबर अपराध के मामलों में तेज़ी से इजाफा हुआ है। दुग्गल का कहना है कि साल 2000 में जिस वक्त साइबर से जुड़े कानून बने थे वह बेहद सख्त थे। इनमें कई धाराएं गैर ज़मानती थी। लेकिन, जब साल 2008 में साइबर से जड़े कानून में संशोधन किया गया तो उनमें कई अपराध को ज़मानती बना दिया गया।
तीन तरह के होते है साइबर अपराध
दुग्गल का कहना है कि साइबर अपराध तीन तरह का होता है। पहला अपराध किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ होता है। जबकि, दूसरा साइबर अपराध संपत्ति के विरुद्ध और तीसरा किसी राष्ट्र के खिलाफ होता है। दुग्गल का आगे कहना है कि साइबर अपराध की दुनिया में भारतीय पुरुष हो या फिर महिलाएं वह तेज़ी से फंस रहे हैं। उसकी सबसे बड़ी वजह है सोशल मीडिया पर आसानी से किसी पर विश्वास कर लेना। उसे सोशल मीडिया पर जिस तरह का ख्वाब दिखाया जाता है उसे वह आसानी से मान लेते हैं।
Source:jagran.com
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