टोरंटो (एएनआई)। टोरंटो में हो रहे खालिस्तान इवेंट में कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रुडियउ की उपस्थिति पर भारत सरकार ने आपत्ति जताते हुए कड़ा विरोध किया है। टोरंटो में आयोजित हुए इस कार्यक्रम के दौरान कथित तौर पर खालिस्तानी झंडे भी लहराए गए थे।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गोपाल बागले ने कहा, ‘पहले भी हम इस तरह के मसलों को कनाडा सरकार के सामने राजनयिक माध्यमों से ले जाते रहे हैं। उन्होंने कहा, इस विशेष मामले में विस्तार से जानकारी के बिना मैं केवल यह कह सकता हूं कि यह तरीका अभी रुका नहीं है।‘ बता दें कि इस समारोह में 1984 के सिख विरोधी दंगों को नरसंहार करार देने वाले ओंटारियो विधानसभा के प्रस्ताव को तैयार करने वाले दो विधायकों को सम्मानित किया गया था।
पिछले महीने रक्षा मंत्री अरुण जेटली ने कनाडा की ओंटारियो विधानसभा में 84 के सिख विरोधी दंगों को नरसंहार करार देने वाला प्रस्ताव पारित किये जाने पर कनाडा के रक्षा मंत्री हरजीत सिंह सज्जन के साथ भारत के विरोध को दर्ज कराया था। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गोपाल बागले से एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कनाडाई पीएम की उपरोक्त कार्यक्रम में मौजूदगी को लेकर सवाल पूछा गया था। खालसा दिवस समारोह सिखों के नव वर्ष के मौके पर आयोजित किया गया था। इससे पहले कनाडा ने पंजाब के सीएम अमरिंदर सिंह के उस बयान को निराशाजनक और अनुचित ठहराया था जिसमें उन्होंने ट्रूडो सरकार के रक्षा मंत्री हरजीत सज्जन समेत 5 मंत्रियों को खालिस्तानी समर्थक और उनसे सहानुभूति रखने वाला बताया था।
30 अप्रैल को ट्रूडो ने खालसा डे के लिए परेड को संबोधित किया था जिसमें भारत द्वारा आतंकवादी घोषित जरनैल सिंह भिंडरवाले, अमरीक सिंह व पूर्व जनरल शाहबेग सिंह की तस्वीरें भी दिखाई गई थीं जो 1984 में ब्लूस्टार ऑपरेशन और गोल्डन टेंपल जब्त करने में मारे गए। यह शोभायात्रा ओंटारियो के सिखों और गुरुद्वारा काउंसिल द्वारा आयोजित किया गया था और इसमें ट्रूडो के लिबरल पार्टी से विधायक हरिंदर कौर माल्ही को सम्मानित किया गया जिन्होंने नवंबर 1984 के सिख विरोधी दंगे को नरंहार बताया जिसे इस साल 6 अप्रैल को ओंटारियो विधानसभा ने पारित किया।
Source:jagran.com
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