हेरात, रायटर। तमाम बाधाओं के बावजूद पढ़ाई जारी रखने वाली अफगान की बहादुर युवा मेधावी छात्राओं को अमेरिका से निराशा मिली है। अफगानिस्तान में लोकतंत्र बहाली के प्रयासों की अगुआई करने वाले अमेरिका ने रोबोट बनाने की प्रतियोगिता में हिस्सा लेने के लिए युवा छात्राओं को वीजा देने से इन्कार कर दिया है।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के यात्रा प्रतिबंध की सूची में शामिल देशों ईरान, सूडान और सीरिया की टीमों के वीजा मिल गया है। अब अफगान छात्राएं स्काइप के जरिये प्रतियोगिता से जुड़ेंगी। अफगानिस्तान यात्रा प्रतिबंध में सूचीबद्ध देशों में शामिल नहीं है। ऐसे में अफगान छात्राओं ने अमेरिकी फैसले पर हैरानी जताई है। अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता ने नियमों का हवाला देते हुए प्रतिक्रिया देने से इन्कार कर दिया। रोबोटिक्स में शामिल अधिकांश छात्राओं का उस वक्त जन्म भी नहीं हुआ था जब अमेरिका ने अफगानिस्तान से तालिबान और अलकायदा को उखाड़ फेंकने और लोकतंत्र को स्थापित करने के लिए वर्ष 2001 में हमला किया था।
प्रतियोगिता के आयोजक फर्स्ट ग्लोबल ने बताया कि अफगानिस्तान की छह सदस्यीय टीम अपने गृह नगर हेरात से स्काइप वीडियो लिंक के जरिये वाशिंगटन से जुड़ेंगी। प्रतियोगिता का आयोजन 16-18 जुलाई को किया जाएगा। कई बड़े आतंकी हमलों का गवाह बने हेरात के लिए वर्षो बाद यह खुशी का पहला मौका है। हालांकि, अमेरिका के रुख से निराशा भी है। अफगानिस्तान में महिलाओं की स्थिति बहुत दयनीय है, ऐसे में ये युवा लड़कियां उनके लिए प्रेरणा बन सकती हैं।
टीम की सदस्य 14 वर्षीय फातिमा कद्रियां इससे हताश हैं। उन्होंने कहा, 'मुझे वीजा न मिलने के वजहों का पता नहीं चल सका है, क्योंकि प्रतियोगिता में हिस्सा लेने वाले अन्य देशों के प्रतिभागियों को वीजा दिया जा चुका है। भविष्य के बारे में कोई नहीं जानता है। हमें उम्मीद है कि हमारे रोबोट को अन्य देशों के साथ स्थान मिलेगा।' फातिमा वीजा आवेदन के लिए दो बार काबुल स्थित अमेरिका दूतावास गई थीं।
फातिमा की टीम की एक अन्य सदस्य लिडा अजीजी (17) ने अमेरिका के प्रति अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा, 'सभी देश प्रतियोगिता में हिस्सा ले सकते हैं, लेकिन अफगानिस्तान नहीं। यह अफगान लोगों का सीधा-सीधा अपमान है।' प्रतियोगिता में 156 देश हिस्सा ले रहे हैं। अफगानिस्तान के अलावा गांबिया की टीम को भी वीजा नहीं दिया गया है।
Source:jagran.com
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