माला दीक्षित, नई दिल्ली। हत्या के एक मामले में दो अभियुक्तों की अपीलों पर सुप्रीम कोर्ट में अलग अलग सुनवाई हुई और सजा भी अलग अलग हुई। एक अभियुक्त को उम्रकैद की सजा हुई तो दूसरे को दस साल की कैद। अब उम्रकैदी ने सहअभियुक्त की सजा का हवाला देते हुए नये सिरे से रिट दाखिल कर सजा कम करने की मांग की है। सुप्रीम कोर्ट उम्र कैदी की याचिका पर नये सिरे से सुनवाई को राजी हो गया है। याचिका पर कोर्ट ने पंजाब सरकार को नोटिस जारी किया है।
यह केस विरला और रोचक इसलिए है क्योंकि अपील, फिर पुनर्विचार और आखिरी विकल्प मानी जाने वाली क्यूरेटिव याचिका खारिज होने के बावजूद सुप्रीम कोर्ट उम्र कैदी की रिट पर नये सिरे से सुनवाई के लिए राजी हो गया है। पंजाब के इस मामले में याचिकाकर्ता दर्शन सिंह के वकील ऋषि मल्होत्रा ने एक ही घटना में शामिल दो अभियुक्तों को अलग अलग सजा का जिक्र करते हुए कोर्ट में समानता की दुहाई दी और दर्शन की सजा भी कम करके दस साल कैद करने की मांग की। उन्होंने कहा कि न्याय के रास्ते में तकनीकी बातें नहीं आनी चाहिए और कोर्ट को पूर्ण न्याय करना चाहिए। दलीलें सुनकर पीठ ने मामले पर विचार का मन बनाते हुए नोटिस जारी किया।
घटना फरवरी 1995 की है जब दो गुट पानी निकासी के झगड़े में शांति भंग की आशंका के चलते फरीदकोट में मजिस्ट्रेट के समक्ष कार्यवाई में कोर्ट गए थे। जब वे कोर्ट के बाहर इंतजार कर रहे थे तभी दोनों गुटों में कहा सुनी होने लगी। कुछ ने कृपाण निकाल ली और हमला कर दिया। इस झगड़े में दो लोगों संता सिंह और हरबंस सिंह की मौत हो गई।
याचिकाकर्ता दर्शन सिंह सहित सात पर हत्या का मुकदमा चला। निचली अदालत ने दर्शन सहित तीन को बरी कर दिया जबकि सह अभियुक्त सुरैन सिंह को हत्या में उम्रकैद दी। इसके अलावा झंडासिंह, जसमेल सिंह और पाल सिंह को को भी हत्या का दोषी माना। राज्य और दोषी दोनों अपील मे हाईकोर्ट पहुंचें। सरकार ने बरी के आदेश को और दोषियों ने सजा को चुनौती दी। हाईकोर्ट ने दर्शन सिंह को बरी करने का फैसला पलट दिया और उसे हत्या के जुर्म में उम्रकैद दी। कोर्ट ने सुरैन सिंह को भी हत्या का दोषी माना। बाकी तीनों को बरी कर दिया।
दर्शन सिंह और सुरैन सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की। सुप्रीम कोर्ट में दोनों की अपीलें अलग समय पर अलग अलग कोर्ट मे सुनवाई के लिए लगीं। पहले दर्शन की अपील पर सुनवाई हुई और कोर्ट ने गत वर्ष 6 जनवरी को अपील खारिज कर दी और उम्रकैद की सजा को सही ठहराया। इसके बाद दर्शन की पुनर्विचार और क्यूरेटिव याचिका भी खारिज हो गईं। सह अभियुक्त सुरैन सिंह की अपील पर इसी वर्ष 10 अप्रैल को सुनवाई हुई जिसमें कोर्ट ने माना की हत्या पूर्वनियोजित नहीं थी अचानक आवेश में घटना घटी जिसमें दो लोगों की मौत हो गई। हत्या का इरादा नहीं था।
सिख होने के नाते सुरैन सिंह कृपाण पहने था जिससे हमला हुआ। कोर्ट ने सुरैन को हत्या के बजाए गैर इरादन हत्या का दोषी ठहराया और सजा उम्रकैद से घटा कर दस वर्ष का कारावास कर दी। अब दर्शन का कहना है कि जब घटना एक थी तो फिर उसे अलग सजा कैसे हो सकती है। उसकी भी सजा सहअभियुक्त की तरह कम की जाए।
Source:jagran.com
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