Thursday, 6 July 2017

कांग्रेस ने की किरण बेदी को हटाने की मांग

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। कांग्रेस ने पुड्डूचेरी सरकार की सिफारिश के बिना भाजपा के तीन नेताओं को विधानसभा का सदस्य मनोनीत करने के उपराज्यपाल किरण बेदी के फैसले को संवैधानिक परंपरा और मर्यादा के खिलाफ बताया है। पार्टी ने किरण बेदी के फैसले को गैर कानूनी और मनमाना करार देते हुए इसकी घोर निंदा की है। साथ ही बेदी को राज्यपाल पद से हटाने की मांग की है।

कांग्रेस ने बेदी के साथ पश्चिम बंगाल के राज्यपाल केशरीनाथ त्रिपाठी की पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को धमकाने के वाकये का जिक्र करते हुए राज्यपालों की बढ़ती सियासी भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठाया है। राजभवनों को सियासत का अड्डा बनाने के आरोप के साथ कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सहकारी संघवाद की बातों को कोरा उपदेश करार दिया।

पार्टी प्रवक्ता सुष्मिता देव ने किरण बेदी के फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि उप राज्यपाल ने लोकतांत्रिक मर्यादा की धज्जियां उड़ा दी है। विधानसभा में मनोनीत सीटों के लिए नाम का चयन संवैधानिक परंपरा के अनुसार राज्यपाल या उपराज्यपाल मुख्यमंत्री और उनकी कैबिनेट की सलाह से करते हैं। मगर बेदी ने मुख्यमंत्री नारायणसामी से कोई मशविरा नहीं किया और न केवल विधायकों का मनोनयन कर डाला बल्कि उन्हें शपथ भी दिला दी।

जबकि विधायकों को शपथ दिलाने का अधिकार विधानसभा अध्यक्ष को है। मगर बेदी ने संविधान और लोकतंत्र की परंपरा के विरूद्ध आचरण कर अपने पद की मर्यादा तोड़ी है। इसलिए कांग्रेस पार्टी न केवल बेदी के आचरण की निंदा करती है बल्कि उन्हें हटाने की मांग भी करती है। राज्यपाल के ममता बनर्जी को धमकाने के सवाल पर देव ने कहा कि भाजपा सरकार के नियुक्त राज्यपालों का यह पहला मामला नहीं है।

मणिपुर, गोवा, अरुणाचल प्रदेश, उत्तराखंड के राज्यपालों की विपक्षी सरकारों को गिराने या आने से रोकने की घटनाएं सामने है। इसलिए ममता बनर्जी का राज्यपाल के गैर मर्यादित आचरण पर मुखर होना जायज है। कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि पीएम जब गुलदस्ता या किसी वस्तु की जगह संविधान को उपहार देने की बात करते हैं तो फिर राजभवन को राजनीति का मैदान बनाने के सवाल का उनके पास क्या जवाब है?

Source:jagran.com

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