बर्लिन, एएफपी। उत्तर कोरिया संकट और जलवायु परिवर्तन पर खींचतान के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप समेत दुनिया के सबसे शक्तिशाली देशों के नेता जर्मनी के हैम्बर्ग शहर में जुटने लगे हैं। शुक्रवार से शुरू हो रहे जी-20 शिखर सम्मेलन में दोनों मुद्दों के छाए रहने की संभावना है।
ट्रंप ने पिछले महीने ऐतिहासिक पेरिस करार से हटने की घोषणा की थी। इसके बाद जलवायु परिवर्तन से निपटने के प्रयास के कमजोर होने की आशंका गहरा गई है। इसके अलावा मंगलवार को उत्तर कोरिया ने पहले इंटर कांटिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल का परीक्षण कर अमेरिका समेत पूरी दुनिया की सिरदर्दी और बढ़ा दी है। सम्मेलन में दोनों मुद्दों के केंद्र में रहने की संभावना है।
अमेरिका के विदेश मंत्री रेक्स टिलरसन ने कहा, 'आइसीबीएम का परीक्षण अमेरिका, सहयोगी देशों, क्षेत्र और पूरी दुनिया के लिए नया खतरा है।' जी-20 शिखर सम्मेलन के दौरान सबकी नजरें राष्ट्रपति ट्रंप पर होंगी जो उत्तर कोरिया के मिसाइल और परमाणु कार्यक्रम को हर हाल में रोकना चाहते हैं। इसके लिए वह चीन पर लगातार दबाव भी बना रहे हैं। इसके अलावा ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच संभावित मुलाकात पर भी दुनिया की निगाहें टिकी हैं। अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव में रूसी हस्तक्षेप के आरोपों की जांच चल रही है। ट्रंप के कई विश्वस्त सहयोगियों को इसके चलते अपने पद से इस्तीफा तक देना पड़ा है। व्यापार के क्षेत्र में ट्रंप की संरक्षणवाद की नीति का मुद्दा भी उठने की संभावना है। चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग और जापानी प्रधानमंत्री शिंजो एबी के बीच मुलाकात पर भी नजर रहेगी। इसके अलावा सीरिया और यूक्रेन से जुड़े मसले भी उठ सकते हैं।
जलवायु परिवर्तन भी अहम मुद्दा
जी-20 बैठक में जलवायु परिवर्तन अहम मुद्दा बनकर उभरेगा। ट्रंप के पेरिस करार से हटने की घोषणा के बावजूद भारत, चीन, जर्मनी समेत दुनिया के तमाम देश समझौते के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जताई है। ऑक्सफोर्ड एनालिटिक्स के अर्थशास्त्री एडम स्लेटर ने इस मुद्दे पर अमेरिका और अन्य सदस्य देशों में ध्रुवीकरण की आशंका जताई है।
Source:jagran.com
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