नोबेल पुरस्कार विजेता मलाला युसुफजई ने बनाया टि्वटर अकाउंट
स्कूली लड़कियों की शिक्षा के लिए अभियान चलाने वाली मलाला यूसुफजई सोशल वेबसाइट टि्वटर से जुड़ गई हैं. बीबीसी के मुताबिक, मलाला (19) ने शुक्रवार को अपने स्कूल के आखिरी दिन टि्वटर ज्वाइन कर लिया.
लंदन : स्कूली लड़कियों की शिक्षा के लिए अभियान चलाने वाली मलाला यूसुफजई सोशल वेबसाइट टि्वटर से जुड़ गई हैं. बीबीसी के मुताबिक, मलाला (19) ने शुक्रवार को अपने स्कूल के आखिरी दिन टि्वटर ज्वाइन कर लिया.
मलाला ने अपने पहले ट्वीट में कहा, "आज स्कूल में मेरा आखिरी दिन है और टि्वटर पर पहला दिना है." उन्होंने कहा कि वह उन लाखों लड़कियों के साथ हैं, जिन्हें उनकी तरह अवसर नहीं मिले.
उन्होंने लोगों से लड़कियों की शिक्षा के लिए जारी उनकी लड़ाई को समर्थन देने की अपील की. उन्होंने कहा कि वह इन गर्मियों में दुनियाभर में लड़कियों की शिक्षा को बढ़ावा देने का प्रचार करेंगी.
उन्होंने लिखा, “मैं अपने भविष्य के लिए उत्साहित हूं, लेकिन दुनिया भर में ऐसी लाखों लड़कियां हैं जो स्कूल नहीं जाती और शायद उन्हें कभी पढ़ाई करने का मौका ना मिल पाए. अगले हफ्ते मैं मिडल ईस्ट, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका में लड़कियों से मुलाकात करूंगी. हर लड़की की कहानी यूनीक है और शिक्षा व समानता में लड़कियों की आवाज सबसे शक्तिशाली हथियार है. ट्विटर पर और इससे बाहर भी मैं लड़कियों के लिए लड़ती रहूंगी. क्या आप मेरे साथ हैं?”
मलाला ने जब लड़कियों की शिक्षा के बारे में ब्लॉग लिखना शुरू किया था, तब उनकी उम्र सिर्फ 11 वर्ष थी.
बीबीसी के मुताबिक, मलाला पर अक्टूबर 2012 में उस समय तालिबान ने हमला किया, जब वह स्कूल बस में सवार हो रही थी. उस समय मलाला की उम्र 15 वर्ष थी. इस घटना के बाद मलाला को दुनियाभर में पहचान मिली.
मलाला को इलाज के लिए ब्रिटेन ले जाया गया. वह इस भयावह घटना से बच निकलीं और तब से ब्रिटेन में ही अपनी स्कूली पढ़ाई पूरी करने लगीं.
बता दें कि मलाला को टि्वटर पर फॉलो करने वालों में कनाडा के पीएम जस्टिन ट्रड्यू, यूएन के जनरल सेक्रेटरी एंटोनिया गुटारेश, बिल गेट्स, उनकी पत्नी मेलिंडा गेट्स, कैलिफोर्निया से सीनेटर कमला हैरिस जैसे नाम शामिल हैं.
लाखों लोगों द्वारा टि्वटर पर फॉलो किए जाने को लेकर मलाला काफी उत्साहित हैं और उन्होंने सभी को शुक्रिया कहा है.
बता दें कि मलाला ने पाकिस्तान में महिलाओं और लड़कियों की अनिवार्य शिक्षा की मांग करते हुए अभियान चलाया था. इसके लिए उन्हें तालिबानी गोली का शिकार भी होना पड़ा था. इसके बाद उनका ब्रिटेन में इलाज चलाया गया और वह यहीं रहने लगीं. मलाला यूसुफजई को 2014 का नोबेल शांति पुरस्कार दिया गया था.
Source:zeenews.com
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