
अरब देशों के बीच अलग-थलग पड़े क़तर पर खाड़ी देशों के प्रतिबंध जारी रहेंगे, सऊदी अरब ने ये जानकारी दी है.
क़तर पर 'आतंकवाद का पोषण' करने का आरोप लगाते हुए खाड़ी देशों ने पिछले महीन उससे राजनयिक संबंध ख़त्म कर लिए थे और फिर उस पर प्रतिबंध भी लगाए थे.
क़तर को इन देशों की कुछ मांगों की सूची सौंपी गई थी जिन्हें मानने से क़तर ने इनकार कर दिया है.
इन मांगों का जवाब देने के लिए क़तर की समयसीमा बुधवार को ख़त्म हो रही थी.
सऊदी अरब, मिस्र, बहरीन और संयुक्त अरब अमीरात के विदेश मंत्रियों की काहिरा में बैठक हुई जिसमें कहा गया कि उन्हें अफ़सोस है कि क़तर ने उनकी मांगों को ठुकरा दिया है.
सऊदी अरब, मिस्र, बहरीन और संयुक्त अरब अमीरात के विदेश मंत्रियों की काहिरा में बैठक हुई जिसमें कहा गया कि उन्हें अफ़सोस है कि क़तर ने उनकी मांगों को ठुकरा दिया है.

इन देशों के अधिकारियों का कहना है कि क़तर स्थिति क गंभीरता को नहीं समझ रहा है.
सऊदी अरब, मिस्र, संयुक्त अरब अमीरात और बहरीन ने क़तर पर जिहादी गुटों की मदद करने के आरोप लगाए हैं.
इन देशों ने क़तर की नीतियों में बदलाव की मांग की थी. क़तर से अल जज़ीरा न्यूज़ चैनल बंद करने और ईरान से संबंध ख़त्म करने समेत कई मांगें रखीं गईं थीं.
खाड़ी देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक से पहले क़तर के विदेश मंत्री शेख़ मोहम्मद बिन अब्दुल रहमान अल थानी ने कहा कि क़तर के साथ संबंध ख़त्म करने का अर्थ है क़तर की घेराबदीं जो साफ़ तौर पर अपमान और आक्रामकता का सबूत है.
उन्होंने कहा, "असहमति का जवाब प्रतबिंध और अल्टीमेटम नहीं हो सकता, बल्कि बातचीत और तर्क हो सकता है. "
Source:bbc.com
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