नई दिल्ली. नरेंद्र मोदी ने भारतीय रेल को देश को गति और प्रगति देने के लिए अहम बताया। रेल विकास शिविर में शामिल अफसरों के बीच पीएम ने कहा, ''मेरा रेलवे से पुराना नाता है। मैं आपके बीच से ही हूं, रेलवाला ही हूं। मेरा बचपन प्लेटफॉर्म पर सिर्फ ट्रेन देखते ही गुजरा। इसमें बदलाव की खुशी आपके जैसी मुझे भी होेगी।'' मोदी ने सूरजकुंड में तीन दिनों तक चलने वाले शिविर का इनॉगरेशन किया। वे आखिरी दिन रविवार को भी यहां पहुंचेंगे। पहले रेल बजट में तालियां मिलती थीं...
- मोदी ने कहा, ''दुनिया की रेल कितनी बदल गई। क्या कारण है कि हमारी रेल इतनी सीमा में बंधी है। दुनिया में काफी प्रयास और प्रयोग हुए हैं। हमे ये समझना होगा कि देश को गति और प्रगति रेल से ही मिलेगी।''
- ''हमें रेल को ताकतवर बनाना है, इसी से देश का विकास होगा। सदी बदल गई है रेलवे भी बदलनी चाहिए, लेकिन सबसे पहले सोच बदलने की जरूरत है।''
- ''पहले रेल बजट में होता था कि किस सांसद को नया ट्रैक मिला, किसे नई ट्रेन मिली। बस इसी में तालियां बजती थीं। लेकिन मैंने लोकलुभावनी बातें करने से बेहतर रेल को बेहतर बनाने की कोशिश की।''
- ''मैं अपने संसदीय क्षेत्र बनारस जाता हूं तो आमतौर पर रेलवे गेस्ट हाउस में रुकने चला जाता हूं। मुझे वहां अपनापन सा लगता है।''
गैंगमेन का बेटा इंजीनियर क्यों नहीं बने: मोदी
- मोदी ने रेलवे में टैलंट को तरजीह और छोटे कर्मचारियों की जिंदगी में बदलाव लाने की पैरवी की। उन्होंने कहा, ''क्या हम ऐसी रेल चलाना चाहते हैं कि एक गैंगमेन का बेटा गैंगमेन ही बने। इंजीनियर क्यों नहीं।''
- अफसरों से कहा, ''रेलवे में समूह चिंतन की बहुत जरूरत है। हमारे काम का तरीका कुछ ऐसा है कि आसपास के लोगों को कम जानते हैं। आप लोग (अफसर) क्यों नहीं बड़े-छोटे की दीवार गिराते। टिकट विंडो पर बैठने वाला क्लर्क भी अच्छा आइडिया दे सकता है, इनके बीच से मोती निकाल सकते हो।''
- ''दो करोड़ लोग रोज रेलवे में ट्रेवल करते हैं, लेकिन हमारी गति, हमारी व्यवस्था। इस चिंतन शिवर से क्या निकले। इसका एजेंडा भी आप लोगों को ही बनाना है।''
Courtesy:bhaskar.com
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