नई दिल्ली, (जागरण ब्यूरो)। नोटबंदी के असर को लेकर केंद्र सरकार ऊपर से चाहे जितना भी आत्मविश्वास दिखाए, मगर अंदर से वह चिंतित भी है। जिस तरह से इसके विरोध में विपक्ष एकजुट हो रहा है और नोट प्रवाह नहीं बढ़ने से आम जनता की दिक्कतें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं, उसकी काट खोजने की भी कोशिश हो रही है। इस संदर्भ में नोटबंदी के फैसले के बाद पकड़े गए काले धन या अघोषित आय पर लगाए गए जुर्माने की राशि बेहद अहम साबित होने जा रही है। केंद्र सरकार की मंशा इस मद में जमा राशि पर लगने वाले जुर्माने का इस्तेमाल ग्रामीण विकास पर खर्च करने की है। वित्त मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का साफ तौर पर यह निर्देश है कि नोटबंदी के फैसले का सीधा फायदा ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वालों और गरीब जनता को पहुंचाने की व्यवस्था होनी चाहिए। इसका उल्लेख उन्होंने आठ नवंबर को राष्ट्र के नाम संबोधन में भी किया था। कैबिनेट में भी दो दिन पहले जब बैंकों में काला धन जमा कराने वालों के खिलाफ जुर्माना वगैरह लगाने के विषय पर चर्चा हुई तो यह बात सामने आई कि इस राशि का किस तरह से इस्तेमाल होना चाहिए। इस पर सभी सहमत थे कि देश में मौजूद काला धन गरीबों का हक मार कर जमा किया गया है, इसलिए इस पर पहला हक उन्हीं का है। नोटबंदी पर पीएम मोदी का मुरीद हुआ चीनी मीडिया, बताया- साहसिक फैसला हक दिलाने का सबसे बेहतर तरीका यह है कि घोषित काले धन पर लगने वाली पेनल्टी का उपयोग गांवों व गरीबों से संबंधित विकास योजनाओं में किया जाए। अगले वित्त वर्ष के आम बजट में ग्रामीण विकास और गरीबों को राहत देने वाली केंद्रीय परियोजनाओं की इससे फंडिंग की जाएगी। अभी अंदाजा तो नहीं है कि इस प्रावधान से कितनी राशि खजाने में आएगी, लेकिन अधिकारी भरोसा जता रहे हैं कि यह राशि काफी ज्यादा हो सकती है। 10 नवंबर से 24 नवंबर के बीच देश के तमाम बैंकों व डाकघरों में 6.50 लाख लाख करोड़ रुपये जमा करवाए गए हैं। सिर्फ जन धन खातों में जमा राशि ही इस दौरान 21,000 करोड़ रुपये से बढ़कर 66,600 करोड़ रुपये हो गई है। इनमें कितना हिस्सा काले धन के तौर पर चिह्नित होता है, यह तो जांच के बाद ही तय होगा। लेकिन सरकार को इसका अंदाजा जल्द हो जाएगा, क्योंकि सारी जांच एजेंसियां इस काम में लग गई हैं। प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में गुरुवार को हुई कैबिनेट की बैठक में नोटबंदी के बाद बैंक खातों में जमा काले धन पर भारी जुर्माना लगाने का प्रस्ताव किया गया है। इसके लिए सरकार ने आय कर कानून में संशोधन करते हुए आमदनी का सही स्त्रोत नहीं बता पाने वालों से घोषित राशि का 60 फीसद जुर्माना लेने का प्रस्ताव है। घोषित राशि के 25 फीसद हिस्से को बैंक में चार साल की अवधि तक रखना अनिवार्य होगा। सरकार के इस प्रस्ताव को एमनेस्टी स्कीम के तौर पर भी देखा जा रहा है। केंद्र का यह प्रस्ताव सामान्य बैंक खातों, जन धन खातों व उन खातों पर भी लागू होगा जिनमें आय कर की सीमा ढाई लाख रुपये से कम राशि जमा की गई है। बड़ी कार्रवाई की तैयारी में सरकार, नोट जमा कराया है तो स्रोत भी बताना होगा
Courtesy:jagran.com
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