आज दुर्लभ योग : स्नान, सूर्य पूजा व दान से मिलेगा पुण्य
Source: Bhaskar News
फरीदाबाद. शनिवार को मकर संक्रांति पर बेहद दुर्लभ योग बन रहा है। साल की 12 संक्रांतियों में से मकर संक्रांति का सबसे ज्यादा महत्व है। इस दिन सूर्य मकर राशि में आता है। इसके साथ देवताओं का दिन शुरू हो जाता है। इसलिइए मकर संक्रांति के दिन स्नान, दान और पूजन का बड़ा ही महत्व है। इस साल मकर संक्रांति पर ऐसा संयोग बना है, जि ससे सूर्य देव और शनि देव दोनों को एक साथ खुश किया जा सकता है। यह ऐसा संयोग है जो कई वर्षों के बाद बना है। 14 जनवरी को सूर्य देव सुबह 7 बजकर 38 मियनट पर मकर राशि में प्रवेश कर रहे हैं। संयोग की बात है कि इस दिन शनि का दिन है। इस दिन मकर संक्रांति का होना एक दुर्लभ संयोग है।
संक्रांति पर स्नान बेहद जरूरी : ज्योतिषाचार्य वीके शास्त्री के अनुसार जो व्यक्ति मकर संक्रांति के पवित्र दिन तीर्थ स्नान नहीं करता वह सात जन्मों तक रोगी और निर्धन ही बना रहता है। मकर संक्रांति के दिन देवताओं के निमित्त तीर्थ में जाकर द्रव्य-सामग्री और पितरों के लिए जो भी पदार्थ दान दिए जाते हैं, उसे देवता और पितर हर्षित होकर स्वीकार कर लेते हैं। देवीपुराण में तो अकाल मृत्यु से बचने के लिए मकर संक्रांति को दुर्गासप्तशती पाठ करने या विद्वान ब्राह्मण से कराने का भी विधान बताया गया है। इसलिए इस दिन स्नान जरूर करना चाहिए।
ऐसे बन रहा है दुर्लभ योग
ज्योतिषाचार्य वीके शास्त्री के अनुसार माघ मास के कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि पर शनिवार के दिन 14 जनवरी को सुबह 7: 38 मिनट पर भगवान सूर्य नारायण का मकर राशि में प्रवेश होगा। उदयकाल की साक्षी में होने वाले इस प्रवेशकाल का धर्म शास्त्रीय महत्त्व है। इस दृष्टि से मकर संक्रान्ति का महापर्वकाल विशेष महत्वपूर्ण माना जाता है। यह पर्व पुण्यकाल की दृष्टि से दिनभर रहेगा संक्रान्ति का नक्षत्र राक्षसी नाम से है। जो कमजोर वर्ग पशुपालक आदि के लिए शुभप्रद रहेगी।
इस दिन क्या करने का महत्व
-मकर संक्रांतिक के दिमन उड़द की दाल में खिभचड़ी बनाकर दान करें और स्वयं भी भोजन करें।
-काले तिल का दान करें और खुद भी तिल से बनीं कुछ चीजें खाएं।
-काले कपड़े का दान करें।
-किसी जरूरतमंद को काले कंबल का दान बहुत ही शुभ फलदायी होगा और शनि के अशुभ प्रभाव को कम करने में सहायक रहेगा।
-संक्रांति के तिल को पानी में मिलाकर स्नान करना चाहिए, अगर संभव हो तो गंगा स्नान करना चाहिए। इसके बाद भगवान सूर्यदेव की पूजा-अर्चना करनी चाहिए। ऐसा करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है।
-संक्रांति पर अपने पितरों का ध्यान और उन्हें तर्पण अवश्य प्रदान करना चाहिए। भगवान सूर्यदेव का स्मरण करना चाहिए।
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