संयुक्त राष्ट्र रिपोर्ट के अनुसार, यह विश्व की सबसे तेजी से वृद्धि करने वाली बड़ी विकासशील अर्थव्यवस्था बनी रहेगा। इसके अनुसार इस वर्ष चीन की आर्थिक वृद्धि 6.5 प्रतिशत रह सकती है।
संयुक्त राष्ट्र की एक रपट में भारत को सबसे ‘गतिशील उभरती अर्थव्यवस्थाओं में’ से एक बताते हुए वित्त वर्ष 2017 में उसकी आर्थिक वृद्धि दर 7.7 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है और यह विश्व की सबसे तेजी से वृद्धि करने वाली बड़ी विकासशील अर्थव्यवस्था बनी रहेगा। इसके अनुसार इस वर्ष चीन की आर्थिक वृद्धि 6.5 प्रतिशत रह सकती है। एशिया और प्रशांत क्षेत्र पर संयुक्त राष्ट्र के आर्थिक और सामाजिक आयोग (यूएन एस्केप) की यहां बुधवार (18 जनवरी) जारी इस रपट में कहा गया है कि अर्थव्यवस्था को मजबूत निजी उपभोग मांग तथा सरकार की ओर से बड़े सुधारवादी कदमों का फायदा होगा। नवंबर में तैयार इस रपट में नोटबंदी के असर को शामिल नहीं किया गया है। रपट में कहा गया है कि 1000, 500 रुपए के पुराने नोटों को चलन से निकालने का एक ‘बड़ा प्रभाव’ उपभोक्ता मांग पर जरूर पड़ेगा पर यह अल्पकाल तक ही समित रहेगा और देश पुन: 7.6-7.7 प्रतिशत की वृद्धि की राह पर आ जाएगा।
संयुक्त राष्ट्र विश्व आर्थिक परिस्थिति व परिदृश्य (डब्ल्यूईएसपी) 2017 रपट बुधवार को यहां जारी की गई। इसमें कहा गया है कि ‘भारत ने अपने आप को एक सबसे गतिवान उभरते बाजार के रूप में जमा लिया है और मजबूत निजी उभोग मांग के साथ भारत की आर्थिक वृद्धि दर वर्ष 2017 में 7.7 प्रतिशत व 2018 में 7.6 प्रतिशत रहने का अनुमान है।’ यूएन एस्केप के आर्थिक मामलों के अधिकारी मैथ्यू हैमिमल ने इस सवाल पर कि इसमें नोटबंदी के असर को शामिल क्यों नहीं किया गया है, कहा, ‘रपट नवंबर में तैयार की गयी और इसे अंतिम रूप दिसंबर में दिया गया।’ इसके साथ ही रपट में आगाह किया गया है कि बैंकों व कंपनियों की बैलेंस शीट पर दबाव व क्षमता का पूरा उपयोग नहीं कर पाने से हो सकता है कि निवेश पूरी ताकत से पटरी पर नहीं लौट पाए। वहीं इसमें चीन की आर्थिक वृद्धि दर वर्ष 2017 व 2018 में 6.5 प्रतिशत पर स्थिर रहने का अनुमान लगाया गया है।
यह रपट संयुक्त राष्ट्र का प्रमुख प्रकाशन है जो कि वैश्विक अर्थव्यवस्था की दशा व दिशा पर प्रकाश डालती है। रिपोर्ट के अनुसार कमजोर अंतरराष्ट्रीय व्यापार और निवेश के चलते धीमी वैश्विक वृद्धि के बावजूद वर्ष 2017 में एशिया का आर्थिक परिदृश्य मजबूत बना हुआ है। वर्ष 2016 में वैश्विक आर्थिक वृद्धि 2.2 प्रतिशत रही है। वर्ष 2008 के वित्तीय संकट की समाप्ति के बाद यह सबसे धीमी वृद्धि है। ब्रिटेन की यूरोपीय संघ से अलग होने की योजना और डोनाल्ड ट्रंप के अमेरिका का राष्ट्रपति चुने जाने से विश्व अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता को बढ़ावा मिला है। रिपोर्ट में कहा है कि चीन में सुस्ती के बावजूद, एशिया लगातार एक आकर्षक स्थान बना हुआ है। इसमें कहा गया है कि क्षेत्र में मजबूत उपभोक्ता मांग और अधिक सरकारी खर्च से कमजोर निर्यात की भरपाई करने में मदद मिली है। पूर्वी और दक्षिण एशिया क्षेत्र की वृद्धि 2016 में 5.7 प्रतिशत रही जो कि इससे पिछले वर्ष के बराबर ही रही।
Source:jansatta.com
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