चंडीगढ़
पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री सुरजीत सिंह बरनाला का शनिवार शाम चंड़ीगढ़ पीजीआई में लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। 91 साल के सुरजीत पंजाब के सीएम रहने के अलावा तमिलनाडु, उत्तराखंड, आंध्र प्रदेश और अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के गवर्नर भी रह चुके थे।
बरनाला को कुछ दिन पहले दिल संबंधी समस्या के चलते पीजीआइ के कार्डियक आइसीयू में भर्ती कराया गया था। जानकारी के मुताबिक हार्ट फेल होने के कारण उनकी मौत हो गई। बरनाल 1985 से 1987 तक पंजाब के सीएम रहे थे।
हाल ही में सुरजीत सिंह बरनाला के बेटे जसजीत सिंह बरनाला आम आदमी पार्टी में शामिल हुए हैं। सुरजीत सिंह की पत्नी सुरजीत कौर बरनाला ने 2004 में शिरोमणि अकाली दल (लोंगोवल) बनाई थी। जिसका 2007 में फिर से अकाली दल में विलय हो गया था। सुरजीत सिंह 1997 में उप राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार भी थे। हालांकि वह कृष्ण कांत से चुनाव हार गए थे।
बरनाला ने पंजाब की कमान ऐसे समय में संभाली थी जब अस्सी के दशक में उग्रवाद पंजाब में चरम पर था। वर्ष 1985 की गर्मियों में संकटग्रस्त पंजाब में शांति बहाल करने के लिए राजीव-लोगोंवाल संधि किए जाने के बाद अकाली दल के उदारवादी नेता बरनाला मुख्यमंत्री बने। तमिलनाडु का राज्यपाल रहते बरनाला ने 1991 में द्रमुक सरकार भंग करने की सिफारिश करने से मना कर दिया था। उस समय चन्द्रशेखर प्रधानमंत्री थे। इनकार के बाद जब बरनाला का बिहार स्थानांतरण किया गया तो उन्होंने राज्यपाल के पद से इस्तीफा देना उचित समझा।
चन्द्रशेखर की अगुवाई वाली केंद्र सरकार ने तब संविधान के अनुच्छेद 356 के 'अन्यथा' प्रावधान का उपयोग कर करुणानिधि की सरकार भंग कर दी थी। बरनाला उत्तराखंड और आंध्र प्रदेश के भी उपराज्यपाल रहे। वह केंद्र में मोरारजी देसाई की सरकार में कृषि मंत्री थे और अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में रसायन एवं उर्वरक मंत्री थे। मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने पूर्व वरिष्ठ अकाली नेता के निधन पर शोक व्यक्त किया है।
पीएम मोदी ने सुरजीत के निधन पर शोक जताते हुए ट्वीट किया, 'सुरजीत सिंह बरनाला के निधन से दुखी हूं। देश के लिए की गई उनकी सेवा और योगदान को याद किया जाएगा।'
Source:indiatimes.com
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