टिप्पणी: सुप्रीम कोर्ट ने कहा- विवाद सुलझने पर भी जघन्य मामले निरस्त नहीं हो सकते:
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि हत्या और बलात्कार जैसे जघन्य अपराधों में चल रही कार्यवाही निरस्त नहीं की जा सकती भले ही पीड़ित या उसके परिवार ने आरोपी के साथ विवाद सुलझा लिया हो।
प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने कहा कि हत्या, बलात्कार और डकैती जैसे जघन्य अपराध निजी स्वरूप के नहीं होते हैं और इनका समाज पर गंभीर प्रभाव होता है। ऐसे गंभीर अपराधों में व्यक्तियों को दंड देने के लिए इनके मुकदमे जारी रखने का निर्णय जनहित के पहलू पर आधारित होता है।
कोर्ट ने कथित रूप से भूमि हथियाने के मामले में चार व्यक्तियों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी रद्द करने से इनकार करने संबंधी गुजरात हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए यह टिप्पणी की। पीठ ने प्राथमिकी निरस्त करने की चार व्यक्तियों की अपील खारिज कर दी। इन पर आरोप है कि उन्होंने गुजरात में फर्जी दस्तावेज के आधार पर भूमि पर कब्जा कर लिया था। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि चूंकि जमीन पर कब्जे की शिकायत करने वाले भू-स्वामी के साथ विवाद सुलझा लिया गया है, इसलिए प्राथमिकी रद्द की जानी चाहिए।
Source: live Hindustan
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