Wednesday, 31 August 2016

संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने परमाणु परीक्षण प्रतिबंध संधि के प्रभाव में लाने का आह्वान किया

संयुक्त राष्ट्र
संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने परमाणु हथियारों की वजह से पर्यावरण और मानव के अस्तिव पर मंडरा रहे खतरों के प्रति आगाह करते हुए कहा है कि देशों को समग्र परमाणु परीक्षण प्रतिबंध संधि (CTBT) को यथाशीघ्र लागू करने के लिए मिलकर काम करना चाहिए। महासचिव ने अंतरराष्ट्रीय परमाणु परीक्षण प्रतिबंध दिवस पर अपने संदेश में कहा, 'इस अंतरराष्ट्रीय परमाणु परीक्षण प्रतिबंध दिवस पर मैं विश्व से इस मुद्दे पर खतरनाक गतिरोध की समाप्ति की सख्त आवश्यकता के वास्ते एकजुटता की भावना अपनाने का आह्वान करता हूं।'

उन्होंने अफसोस जताया कि महासभा द्वारा 20 साल पहले इसे अंगीकार किए जाने के बाद भी यह बहुपक्षीय संधि अबतक लागू नहीं हुआ है। CTBT एक बहुपक्षीय संधि है जो सभी माहौलों में सभी परमाणु विस्फोटों, चाहे वे नागरिक उद्देश्य के लिए हों या सैन्य उद्देश्य के लिए, पर रोक लगाती है। इसे 10 सितंबर, 1996 को संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा अंगीकार किया गया था लेकिन अबतक यह लागू नहीं हुआ है क्योंकि आठ खास देशों ने इसे अबतक अनुमोदित नहीं किया है।

उन्होंने कहा, 'परमाणु हथियारों से हमारे सामूहिक मानव एवं पर्यावरण सुरक्षा, यहां तक कि हमारे अपने अस्तित्व पर मंडरा रहे त्रासदीपूर्ण जोखिम को देखते हुए हमें इस गतिरोध को दूर करना चाहिए।' पिछले सालों में संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने यह कहते हुए भारत, पाकिस्तान, चीन और अमेरिका से CTBT को अनुमोदित करने का आह्वान किया था कि इस संधि को लागू होना आवश्यक है।

फिलहाल 183 देशों में से 164 इस पर मुहर लगा चुके हैं। इस संधि के प्रभाव में आने के लिए अनुसूची दो के देशों का अनुमोदन आवश्यक है। उनमें चीन, उत्तर कोरिया, मिस्र, भारत, ईरान, इस्रायल, पाकिस्तान और अमेरिका ने इसे अबतक अनुमोदित नहीं किया है।

Courtesy: India times. Com

इंडोनेशिया ने हज पासपोर्ट जारी करने पर रोक लगाई

फिलीपींस ने मुस्लिम यात्रियों के लिए हज पासपोर्ट जारी करना रोक दिया है। यह कदम 170 से ज्यादा इंडोनेशियाई लोगों के पकड़े जाने के बाद उठाया गया है। ये लोग फर्जी दस्तावेज के जरिये

मनीला, आइएएनएस : फिलीपींस ने मुस्लिम यात्रियों के लिए हज पासपोर्ट जारी करना रोक दिया है। यह कदम 170 से ज्यादा इंडोनेशियाई लोगों के पकड़े जाने के बाद उठाया गया है। ये लोग फर्जी दस्तावेज के जरिये पासपोर्ट हासिल कर सऊदी अरब जाने की फिराक में थे।

विदेश सचिव परफेक्टो यासय ने कहा है कि विदेश विभाग में हज पासपोर्ट भ्रष्टाचार का स्रोत बन गया है। इसलिए सरकार ऐसे दस्तावेजों को जारी करने के काम को निलंबित कर रही है। हज पासपोर्ट विशेष यात्रा दस्तावेज होता है जो मक्का जाने वाले यात्रियों के लिए जारी किया जाता है।

19 अगस्त को फिलीपींस के आव्रजन एजेंटों ने 177 इंडोनेशियाई नागरिकों को पकड़ा था। ये लोग हज पासपोर्ट के जरिये देश से बाहर जाने के प्रयास में थे। इस मामले में कुछ अधिकारियों को भी हिरासत में लिया गया है। इन लोगों ने पासपोर्ट मुहैया कराने में मदद की थी। प्रारंभिक जांच से पता चला है कि प्रत्येक पासपोर्ट के लिए छह हजार से लेकर दस हजार डॉलर वसूले गए थे।

Courtesy:jagran. Com

भारत-अमेरिका के रक्षा समझौते से चीन को डरने की जरुरत नहीं : किर्बी

वाशिंगटन : अमेरिका और भारत के बीच साजो-सामान से जुडा सैन्य समझौता होने के बाद ओबामा प्रशासन ने कहा है कि चीन को इन दोनों देशों के बीच के मजबूत संबंधों से डरने की कोई जरुरत नहीं है. रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता जॉन किर्बी ने कल अपने दैनिक संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘स्पष्ट तरीके से कहूं तो भारत के साथ एक गहरे, मजबूत, ज्यादा सहयोगी द्विपक्षीय संबंध से किसी अन्य को डरने या इस बारे में चिंता करने की जरुरत नहीं है.' किर्बी दरअसल भारत और अमेरिका के बीच हुए रक्षा समझौते पर चीन की प्रतिक्रिया से जुडे सवाल का जवाब दे रहे थे. यह समझौता इन दोनों देशों की सेनाओं को मरम्मत एवं आपूर्ति के लिए एक दूसरे की संपत्ति एवं अड्डे इस्तेमाल करने की इजाजत देता है.

किर्बी ने कहा, ‘हम दोनों ही लोकतांत्रिक देश हैं. वैश्विक मंच पर हम दोनों के ही पास अदभुत अवसर हैं और हमारा अदभुत प्रभाव है. अमेरिका और भारत के बीच बेहतर संबंध होना न सिर्फ दोनों देशों के लिए, न सिर्फ क्षेत्र के लिए बल्कि पूरे विश्व के लिए अच्छा है.' एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, ‘अमेरिका और भारत के बीच पहले से ही कई क्षेत्रों में शानदार साझेदारी है. यह सिर्फ रक्षा या सुरक्षा से जुड़ा नहीं है. यह आर्थिक, व्यापार एवं सूचना और प्रौद्योगिकी साझा करने के बारे में भी है.'

Courtesy: prabhatkabhar. Com

सीरिया: अमरीकी हमले में मारा गया आईएसआईएस का टॉप लीडर

बेरूत। सीरिया के अलेप्पो शहर में अमरीका के गठबंधन वाले देशों के हमले में आतंकवादी संगठन इस्लामिक स्टेट (आईएस) के एक प्रवक्ता अबू मुहम्मद अल अदनानी की मौत हो गई है। आईएस से जुड़ी समाचार एजेंसी अमाक ने यह जानकारी दी। वहीं अमरीका ने भी इस बात की पुष्टि की है कि हवाई हमले में इस्लामिक स्टेट ने सीरिया के अलेप्पो प्रांत में समूह के प्रवक्ता और विदेशी आतंकी अभियानों के रणनीतिकार अबु मोहम्मद अल-अदनानी मारा गया है।

एजेंसी ने बताया कि प्रवक्ता की मौत अलप्पो में चल रही सैन्य कार्रवाई के जवाब में अभियान के लिए सर्वे के दौरान हुई। अमाक ने कहा कि अदनानी अलेप्पो के खिलाफ सैन्य गतिविधियों को विफल करने के अभियानों का सर्वेक्षण करते हुए शहीद हो गया। आईएस ने अदनानी की मौत का बदला लेने का भी संकल्प लिया है। अल-अदनानी कथित तौर पर आईएस में सबसे लंबे समय तक काम करने वाला नेता था। सीरिया में तुर्की और अमरीका के गठबंधन वाली सेना उत्तरी सीरिया में आईएस के ठिकानों पर पहले से ही हमले कर रही है। 

अल-अदनानी की मौत आईएसआईएस के लिए काफी बड़ा झटका है। ऐसा इसलिए क्योंकि वह इस संगठन का सबसे अहम सार्वजनिक चेहरा था। साथ ही अमरीका की अगुवाई में संगठन के खिलाफ अभियान चला रहे देशों पर कब और कैसे हमला करना है, इस बारे में निर्देश वही जारी करता था। वहीं पेंटागन के प्रेस सचिव पीटर कुक ने कहा कि गठबंधन बलों ने आईएसआईएल के एक सबसे वरिष्ठ नेता अबु मोहम्मद अल-अदनानी को निशाना बनाकर सीरिया में अल बाब के पास एक हमला किया। 

पीटर कुक ने कहा कि हम इस हमले के नतीजों का अब भी आकलन कर रहे हैं, लेकिन युद्धक्षेत्र से अल-अदनानी का सफाया आईएसआईएल के लिए एक और बड़ा झटका साबित होगा। अल-अदनानी आईएसआईएस के गठन के वक्त से ही उसके साथ जुड़ा हुआ था और वह बगदादी का काफी करीबी माना जाता है। जून 2014 में उसी ने सबसे पहले सीरिया और इराक के कुछ हिस्सों में खलीफा का शासन शुरू किया था। 

Courtesy: patrika.com

अमेरिका में पाक राजदूत के 'जलील' होने की रिपोर्टों को इस्लामाबाद ने बताया बेबुनियाद

इस्लामाबाद
अमेरिका में पाकिस्तान के राजदूत को ओबामा प्रशासन की तरफ से फटकार लगाए जाने की बात से इस्लामाबाद ने साफ तौर से इनकार किया है। पाकिस्तान ने उन मीडिया रिपोर्टों को पूरी तरह से बेबुनियाद बताया है जिनमें उसके राजदूत जलील अब्बास जिलानी को अमेरिका से फटकार पड़ने की बात कही गई थी। मीडिया में यह मामला राजदूत के ट्विटर प्रोफाइल पर शेयर की गई उस तस्वीर के बाद तूल पकड़ा जिसमें जिलानी, उनकी पत्नी और फर्स्ट लेडी मिशेल ओबामा थीं।

पाकिस्तान के विदेश विभाग ने एक बयान जारी कर कहा, 'अमेरिका में पाकिस्तान के राजदूत जलील अब्बास जिलानी को वाइट हाउस की नाखुशी वाली चिट्ठी से जुड़ी मीडिया रिपोर्टें पूरी तरह से गलत और बेबुनियाद हैं।' बयान में कहा गया है, 'वाइट हाउस की तरफ से ऐसी कोई चिट्ठी वॉशिंगटन में न तो हमारे दफ्तर को भेजी गई है और न ही हमारी मिनिस्ट्री को। यह और कुछ नहीं बल्कि रिपोर्टर की अपनी कल्पना है।'

बयान में आगे कहा गया है कि वॉशिंगटन में मौजूद रिपोर्टर का बिना हकीकत की पड़ताल किए आधारहीन स्टोरी करना 'अनैतिक' है। पाकिस्तानी अखबार 'द न्यूज इंटरनैशनल' ने अपनी एक रिपोर्ट में दावा किया था कि वाइट हाउस ने पाकिस्तान के राजदूत को उनकी 'हरकतों' पर कड़े शब्दों में फटकार लगाई थी।

पाकिस्तानी अखबार का कहना है कि मिशेल के साथ वाली तस्वीर को ट्वीट करने पर वाइट हाउस ने यह चिट्ठी लिखी है। अखबार के मुताबिक तस्वीर में राजदूत जलील ने यह संकेत देने की कोशिश की कि अमेरिका के पहले परिवार से उनकी बेहद नजदीकी है। मीडिया के एक तबके में मिशेल और पाकिस्तानी राजदूत के बीच द्विपक्षीय मुद्दों पर हुई बातचीत को लेकर भी रिपोर्टें आईं।

'द न्यूज इंटरनैशनल' की रिपोर्ट के अनुसार एक निजी मुलाकात का सियासी फायदा उठाने की कोशिश से नाराज अमेरिका ने यह चिट्ठी लिखी। गौरतलब है कि राजदूत जिलानी का सबसे छोटा बेटा उसी स्कूल में पढ़ता था जहां राष्ट्रपति ओबामा की बेटियां पढ़ती हैं।

Courtesy: India times. Com

चीन की सेना ने अपनी पहली हवाई एंबुलेंस सेवा शुरू की

बीजिंग : सीमा पर सेना, नौसैनिक अभियानों और विदेशों में शांति मिशन के दौरान घायल सैनिकों को बाहर निकालने के लिए चीन ने पहली सैन्य हवाई एंबुलेंस सेवा की शुरुआत की है. सरकारी पीपुल्स डेली ने खबर दी है कि चीन के सेंट्रल मिलिटरी कमीशन के लॉजिस्टिक सपोर्ट डिपार्टमेंट के तहत मिलिटरी ट्रांसपोर्टेशन इंस्टीट्यूट ने चीन के पहले हवाई एंबुलेंस के महीने भर तक का अंतिम पर्यावरणीय मानक परीक्षण को पूरा कर लिया है. इस एंबुलेंस को संयुक्त रूप से सेना-नागरिक सहयोग से बनाया गया है.

खबर में बताया गया है कि पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के सैनिकों द्वारा अदन की खाडी में नौसेना इस्कॉर्ट मिशन जैसे सीमा पार सैन्य अभियान चलाए जाने, अंतरराष्ट्रीय शांति और संयुक्त सैन्य अभ्यास किए जाते हैं जिससे इसके अपने हवाई एंबुलेंस की आवश्यकता है. अभी तक इसे अपने जख्मी और बीमार सैनिकों की सहायता के लिए असैन्य विमानन पर निर्भर रहना पडता था.

ट्रांसपोर्टेशन ब्यूरो ने इमरजेंसी टरीटमेंट सेंटर ऑफ रेड क्रॉस ऑफ चाइना, बीजिंग शाखा के साथ जून 2016 में एक समझौता किया ताकि पीएलए के बीमार और जख्मी सैनिकों को बचाया जा सके. इसने कहा कि पिछले महीने ट्रांसपोर्टेशन ब्यूरो का विशेष चिकित्सा विमान दक्षिण सूडान से चीन के गंभीर रूप से जख्मी दो शांति सैनिकों को लगातार 18 घंटे तक उड़ान भरकर वापस चीन लाया था.  खबर में बताया गया कि जख्मी सैनिकों को सीमा पार से वापस लाने का यह पहला अभियान था.

Courtesy: prabhatkabhar. Com

पाकिस्तान की पायलट बहनों ने बनाया अनूठा रिकॉर्ड, एक साथ विमान उड़ाकर रचा इतिहास!

इस्लामाबाद। पाकिस्तान की राष्ट्रीय एयरलाइन पीआईए के लिए पायलट के तौर पर काम करने वाली दो बहनों ने एक साथ बोइंग 777 विमान को उड़ाकर इतिहास रच दिया है। एयरलाइन ने आज बताया कि इस विमान को एक साथ उड़ाने वाला यह इस तरह का पहला जोड़ा है।

पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय एयरलाइन (पीआईए) के प्रवक्ता दानयाल गिलानी ने कहा कि मरयम मसूद और ईरूम मसूद इससे पहले तक अलग-अलग विमानों को उड़ाती थीं, लेकिन अंतत: उन्हें एक साथ एक विमान उड़ाने का मौका मिला।

उन्होंने ट्वीट किया कि बोइंग 777 को एक साथ उड़ाकर पायलट बहनों ने पीआईए के लिए इतिहास रच दिया है। उन्होंने बताया कि ऐसा कोई ज्ञात रिकॉर्ड नहीं है जिसमें कि दो सगी बहनों ने एक ही वजन श्रेणी का विमान एक साथ उड़ाया हो। ईरूम को हाल ही में पदोन्नति के बाद बोइंग 777 उड़ाने की मंजूरी मिली थी, जिसके चलते बहनों के कॉकपिट में साथ आने का संयोग बन पाया।

यह पीआईए के लिए अच्छा समाचार है क्योंकि यह एयरलाइन बीते कई साल से घाटे में चल रही है। पीआईए अपना प्रदर्शन सुधारने के लिए लगातार संघर्ष कर रही है। इस एयरलाइन ने ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए 14 अगस्त से प्रीमियर सेवा भी शुरू की थी।

Courtesy: ibnlive. Com

Aliens: अंतरिक्ष से आया है Strong Signal, वैज्ञानिकों में मची खलबली

धरती के अलावा यूनिवर्स में कहीं जीवन है या नहीं ये अभी तक एक बेहद जटिल लेकिन ज़रूरी सवाल बना हुआ है। आपको बता दें कि इस बार अंतरिक्ष से एक ऐसी रहस्यमयी आवाज आई है जिसे लेकर दुनियाभर की ऑब्जर्वेटरिज़ बेहद परेशान हैं। यह सिग्नल एक रूसी प्रयोगशाला के एक रेडियो टेलीस्कोप ने 15 मई, 2015 को रिसीव किया था, जो धरती से करीब 95 प्रकाशवर्ष दूर एक तारे HD 16495 से यहां तक पहुंचा है।

वैज्ञानिकों का स्पष्ट मानना है कि इतनी दूर से इस तरह का सपष्ट सिग्नल सिर्फ कोई उन्नत सभ्यता ही भेज सकती हैं। अभी तक धरती पर भी ऐसा कोई यंत्र नहीं बनाया जा सका है जो इतना मजबूत सिग्नल भेज सके। इस नई रिपोर्ट से अमेरिका की संस्था SETI ने उस तारे पर नज़र रखना शुरू किया लेकिन कुछ हासिल नहीं कर सके, हालांकि उनकी नजर अभी भी बनी हुई है।

गौरतलब है कि 2015 में रूस के टेलिस्कोप 'रतन-600' ने ये सिग्नल स्पेस से डिटेक्ट किया था। वैज्ञानिकों के मुताबिक ये सिग्नल इस बात का तो सबूत है कि कहीं से इसे पृथ्वी के लिए भेजा गया है। वैज्ञानिकों ने फिलहाल इसे लेकर तलाश और शोध जारी रखी है। 

Courtesy: livehindusthan. Com

Tuesday, 30 August 2016

लैंगिक समानता के लिए ‘गो टॉपलेस डे'' पर महिलाओं ने उतारे टॉप

हैम्पटन (अमेरिका) : लैंगिक समानता को प्रोत्साहित करने वाले और अपने वक्षस्थल को सार्वजनिक तौर पर निर्वस्त्र कर सकने के महिलाओं के अधिकारों की वकालत करने वाले ‘गो टॉपलेस डे' के अवसर पर अमेरिका में महिलाएं अपने टॉप उतार रही हैं. गो टॉपलेस डे वार्षिक तौर पर उस रविवार को मनाया जाता है, जो वूमन्स इक्वेलिटी डे के सबसे करीब होता है. वूमन्स इक्वेलिटी डे वह दिन है, जब अमेरिकी महिलाओं को मताधिकार मिला था. कल न्यूयॉर्क सिटी में परेड करते हुए कई दर्जन महिलाएं और कुछ पुरुष टॉपलेस होकर निकले. इस मार्च का नेतृत्व कुछ महिलाएं कर रही थीं, जिन्होंने हाथ में एक बैनर पकडा था. इनके पीछे अन्य टॉपलेस लोग थे.

विश्व के अन्य शहरों के लिए भी न्यूयॉर्क सिटी जैसे इस आयोजन की योजना थी। न्यू हैंपशायर, डेनवार, लॉस एंजिलिस और अन्य शहरों में इस आयोजन की योजना था. गो टॉपलेस की अध्यक्ष नैडिन ग्रे ने कहा कि वह उम्मीद करती हैं कि ये आयोजन महिलाओं के वक्षस्थल को लेकर व्याप्त हैरानी और विस्मय की भावना को दूर करेंगे.

उन्होंने कहा, ‘न्यूयॉर्क सिटी में हम बिना कोई टिकट लिए या बिना जेल जाए स्वतंत्र तरीके से टॉपलेस हो सकने के अपने अधिकार का जश्न मना रहे हैं. अन्य स्थानों पर यह एक विरोध प्रदर्शन की तरह होगा क्योंकि भेदभाव अब भी हो रहा है.'

उन्होंने कहा, ‘21वीं सदी में महिलाओं द्वारा टॉपलेस हो सकने की वकालत करने का प्रयास उतना ही मजबूत है, जितना 20वीं सदी में महिलाओं द्वारा मताधिकार हासिल करने के लिए था. यह कामुक हो सकता है लेकिन कामुक होना कोई अवैध नहीं है. यह सउदी अरब नहीं है.' न्यूयॉर्क में टॉपलेस होने को वर्ष 1992 से वैध कर दिया गया है. इस संदर्भ में वैधता अलग-अलग राज्यों के हिसाब से अलग-अलग है.

Courtesy: prabhatkabhar. Com

ईरानी परमाणु वार्ताकार जासूसी के आरोप में गिरफ्तार

परमाणु सूचनाएंं लीक करने के आरोप में एक व्‍यक्ति को गिरफ्तार किया गया है।

तेहरान (रॉयटर)। एक ईरानी नागरिक को ईरान के परमाणु समझौते की सूचनाएं पश्चिमी देश को देने के संदेह में गिरफ़्तार किया गया है। न्यायपालिका के एक प्रवक्ता गुलामहोसैन मोहसेनी इजेही ने गिरफ्तार किए गए शख्स को 'परमाणु दल में घुसपैठ करने वाला एक जासूस' बताया। उन्होंने कहा कि इस व्यक्ति को जमानत पर छोड़े जाने से पहले कई दिनों तक हिरासत में रखा गया था। अमरीका, ब्रिटेन, चीन, फ्रांस, जर्मनी और रूस के साथ हुए परमाणु समझौते के बाद ईरान पर लगे प्रतिबंध हटा लिए गए थे।

एक ईरानी न्यूज़ एजेंसी ताबनाक की खबर के मुताबिक अब्दुलरसूल दोरी इस्फाहनी को देश की आर्थिक सूचनाएं विदेशियों को बेचने के आरोप में गिरफ्तार किया गया। उनके पास दोहरी नागरिकता है और वे दो सालों तक चली परमाणु समझौते की वार्ता के दौरान बैंकिंग मामलों को देख रहे थे। लेकिन दोरी इस्फ़ाहनी ने ताबनाक को दिए एक इंटरव्यू में इन खबरों को खारिज किया और हास्यास्पद बताया। ईरानी मीडिया की खबरों के मुताबिक दोरी इस्फहनी परमाणु डील करा रहे एक मुख्य वार्ताकार के दल के सदस्य थे। ये दल ईरान पर लगे आर्थिक प्रतिबंधों को हटाने के लिए समानांतर रूप से काम कर रहा था।

तेहरान में एक अभियोजक अब्बास जाफरी दौलतबंदी ने पिछले हफ़्ते कहा था कि पकड़ा गया संदिग्ध "ईरानी अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में सक्रिय है, और ब्रितानी गुप्तचर सेवा से जुड़ा है। ईरानी मीडिया में ऐसी ख़बरें हैं कि हिरासत में लिए गए व्यक्ति संबंध अमरीकी और ब्रिटेन की खुफिया सेवाओं से है। हालांकि इस ख़बर की पुष्टि नहीं हुई है।

Courtesy: jagran. Com

रेस्ट्रॉन्ट ने कहा, सभी मुस्लिम आतंकी, निकलो यहां से

पैरिस
एक महंगे और लग्जरी फ्रेंच रेस्ट्रॉन्ट पर 'इस्लामोफोबिया' का आरोप लगा है। इस रेस्ट्रॉन्ट ने मुस्लिम ग्राहकों को सर्व करने से इनकार कर दिया और तर्क दिया कि सभी मुस्लिम आतंकवादी हैं। इस मामले में एक फुटेज ऑनलाइन पोस्ट किया गया है। फ्रांस में यह फुटेज व्यापक संख्या में लोगों तक पहुंचा है। फुटेज में दिख रहा है कि दो मुस्लिम महिलाओं को रेस्ट्रॉन्ट ने सर्व करने से इनकार कर दिया।

यह मामला थॉम्बले-ओन-फ्रांस में ली सेनैको का है। एक आदमी जो कि रेस्ट्रॉन्ट का शेफ है, वह महिला से कहा रहा है, 'आतंकवादी मुसलमान हैं और सभी आतंकवादी मुसलमान हैं। इन्होंने हाल ही में एक पादरी की जान ले ली। यह सेक्युलर देश है और हमें अपना विचार रखने का पूरा हक है। आप जैसे लोगों को मैं यहां नहीं चाहता। पूरी तरह से रोक लगनी चाहिए।'

शेफ की बदतमीजी से महिला पूरी तरह हैरान दिख रही है। शेफ ने कहा कि यहां से आपलोग निकल जाएं। दोनों महिलाओं ने जवाब में कहा, 'आप अब गुस्सा मत कीजिए। हमलोग यहां से जा रहे हैं।'

ली परीजियन की रिपोर्ट के मुताबिक पुलिस ने इस शेफ से नस्ली भेदभाव के मामले में पूछताछ की है। उसने लोकल मीडिया से कहा, 'मैंने इस मामले में माफी मांग ली है। बटक्वलान हमले में मेरा एक दोस्त मारा गया था लेकिन मैंने गलती से चीजों को मिक्स कर दिया। मैंने जो कहा उस पर भरोसा नहीं करता। मैं जो सोचता हूं और जैसे रहता हूं उसका मेरे कॉमेंट से कोई संबंध नहीं है। मैंने गुस्से में ऐसा कह दिया था।'

इस वाकये के विरोध में स्थानीय मुस्लिम समुदाय के लोग रेस्ट्रॉन्ट के बाहर जुट गए थे। ये रेस्ट्रॉन्ट से माफी की मांग कर रहे थे। कई लोगों ने इस रेस्ट्रॉन्ट का बहिष्कार करने की बात कही। कमिटी अगेंस्ट इस्लामोफोबिया इन फ्रांस ने एक बयान जारी कर दोनों महिलाओं को कानूनी और भावनात्मक से रूप मदद करने की भी बात कही है।

फ्रांस में बुर्किनी बैन को लेकर काफी तनाव है। इस बैन को लेकर मुस्लिमों में नाराजगी है। इस हफ्ते फ्रांस के सर्वोच्च कोर्ट ने बुर्किनी बैन को अवैध करार दिया था। हालांकि फ्रांस के दक्षिणपंथी नेता इसे लेकर संसद में कानून बनाने की मांग कर रहे हैं।

Courtesy: Indiatimes. Com

सिंधु, साक्षी व दीपा करमाकर को 1-1 करोड़ देगी यूपी सरकार

रियो ओलंपिक में रजत पदक विजेता बैडिमंटन खिलाड़ी पी.वी. सिंधु, कांस्य पदक विजेता पहलवान साक्षी मलिक और जिमनास्टिक में ऐतिहासिक प्रदर्शन करने वाली दीपा करमाकर को उत्तर प्रदेश सरकार एक-एक करोड़ रुपए का नगद पुरस्कार देगी। यह घोषणा सोमवार को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने ‘लक्ष्मण’ व ‘रानी लक्ष्मीबाई’ पुरस्कार से खिलाड़ियों के सम्मान समारोह में की।

उन्होंने कहा कि पुलिस विभाग में खेल कोटे के रिक्त पड़े पदों पर भर्ती की जाएगी। उन्होंने मुख्य सचिव दीपक सिंघल से कहा कि वह खिलाड़ियों की भर्ती जल्द से जल्द कराएं। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने 11 महिला खिलाड़ियों को रानी लक्ष्मीबाई पुरस्‍कार और नौ पुरुष खिलाड़ियों को लक्ष्मण पुरस्कार से सम्मानित किया। यह सम्मान 2014-15 और वर्ष 2015-16 के लिए दिया गया।  इसके अलावा रियो ओलंपिक में हिस्सा लेने वाले राज्य के 10 खिलाड़ियों को 10-10 लाख रुपए से पुरस्कृत किया गया।

Courtesy: livehindusthan. Com

माल्या की अर्जी पर SC ने बैंकों से मांगा जवाब

बैंकों के समूह ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि शराब कारोबारी विजय माल्या ने जानबूझकर अपनी पूरी संपत्तियों का ब्योरा नहीं दिया है. बैंकों ने कहा कि माल्या ने ये भी छुपाया कि इसी साल फरवरी में उन्हें 40 मिलियन डॉलर की रकम ब्रिटेन की एक कंपनी से मिले हैं. कोर्ट ने अवमानना नोटिस वापस करने की माल्या की अर्जी पर बैंकों के समूह से जवाब मांगा है.

बैंकों के समूह की तरफ से पेश होते हुए अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने जस्टिस कुरिएन जोसफ और जस्टिस रोहिंटन नरीमन की बेंच को बताया कि इसी साल मार्च के महीने में माल्या ने अपनी कुछ संपत्तियों का खुलासा किया, लेकिन उसमें फरवरी में ब्रिटेन से मिली 40 मिलियन डॉलर की रकम का जिक्र नहीं किया.

रोहतगी ने कहा कि विजय माल्या को अवमानना याचिका पर नोटिस जारी हो चुका है और उन्हें अदालत में पेश होना चाहिए था. उन्हें अदालत में पेश होने से छूट नहीं मिली है और अब उनका पक्ष नहीं सुना जाना चाहिए.

'माल्या के खिलाफ नहीं बनता अवमानना का मामला'
दूसरी ओर, विजय माल्या के वकीलों ने अदालत से कहा कि माल्या की तरफ से अदालत की अवमानना का नोटिस वापस लेने के आदेश के लिए याचिका लगा दी गई है. उनके खिलाफ अवमानना का मामला नहीं बनता, क्योंकि कोर्ट के आदेश के बाद उन्होंने अपनी संपत्तियों का ब्योरा दे दिया है. कोर्ट ने अवमानना नोटिस वापिस लेने की माल्या की अर्जी पर बैंकों के समूह से जवाब मांगा है और मामले की अगली सुनवाई के लिए 27 सितंबर की तारिख तय कर दी.

गौरतलब है की 17 बैंकों के समूह ने माल्या पर 9 हजार करोड़ से ज्यादा के बकाए का दावा किया है.

Courtesy: aajtak. In

नेपाल के डांग से दिल्ली के लिए बस सेवा

काठमांडू
पश्चिमी नेपाल के डांग शहर से नई दिल्ली की सीधी डीलक्स बस सेवा की शुरुआत सोमवार को यहां एक बस उद्यमी समिति ने की।राप्ती जोनल पब्लिक ट्रांसपोर्ट बस आंत्रप्रन्योर्स कमेटी ने नई बस सेवा की शुरुआत की है।

पश्चिमी नेपाल में रहने वाले लोग अब डांग के भालुबंग से सीधे दिल्ली की यात्रा कर सकते हैं। समिति के अध्यक्ष सुरेश हमल के अनुसार पहली बार दो दक्षिण एशियाई शहरों के बीच सीधी डीलक्स बस सेवा की शुरुआत की गई है।

उन्होंने बताया कि पहली बस डांग से स्थानीय समयानुसार सुबह 11:30 बजे नई दिल्ली के लिए रवाना होगी। प्रत्येक सप्ताह तीन बसें डांग से भारतीय राजधानी जाएंगी। यात्रा के लिए एक तरफ का किराया 2,000 नेपाली रुपये है, जो 1250 रुपये के बराबर है।

Courtesy: India times. Com

Monday, 29 August 2016

SC की फटकार के बावजूद आजम खान ने बुलंदशहर गैंगरेप पर दोहराया अपना बयान

भले ही सुप्रीम कोर्ट ने आजम खान को बुलंदशहर के गैंग रेप की घटना को राजनीतिक साजिश बताने के लिए फटकार लगाई हो लेकिन आजम खान के सुर अभी भी नहीं बदले हैं. सोमवार को इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी के बारे में पूछे जाने पर आजम खान ने पहले तो उसे कोर्ट का मामला कहकर कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया. लेकिन जब उनसे दोबारा पूछा गया, तब आजम खान ने लगभग अपनी बात को दोहराते हुए कहा कि अगर एक के बाद एक लगातार एक जैसी रेप की घटनाएं हो, तो राज्य सरकार का यह दायित्व बनता है कि वो इसके पीछे की सच्चाई का पता लगाए.

आजम खान ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार का एक जिम्मेदार मंत्री होने के नाते उनका भी यह दायित्व बनता है की सच्चाई के तह तक जाने की कोशिश करें कि आखिर एक के बाद एक लगातार एक जैसे अपराध क्यों हो रहे हैं. हालांकि आजम खान ने यह भी कहा कि वह चाहते हैं कि रेप के मामले में इस्लामिक कानून के हिसाब से सख्त सजा हो और फैसला एक हफ्ते के भीतर हो. इस्लामिक कानून के हिसाब से बलात्कार की सजा के तौर पर पत्थरों से मारकर अपराधी की जान ली जाती है.

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बारे में पूछे जाने पर आजम ने यह सफाई भी दी कि उन्होंने ऐसा कुछ भी नहीं कहा जिससे पीड़ित परिवार को ठेस लगे. न ही उन्होंने ऐसा कुछ कहा है जिससे मुकदमा कमजोर हो और ना ही उन्होंने अफसरों पर इस मामले को कमजोर करने के लिए कोई दबाव डाला. लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने आजम खान के बयान पर नाराजगी जताते हुए पूछा है कि क्या सरकार का कोई जिम्मेदार आदमी जिसका इस मामले से कोई लेना-देना नहीं 

Courtesy: aajtak. In

गंगा की लहरों से लड़ने निकली जलपरी, 570km का सफर करेगी तय

रियो ओलंपिक में बेटियों ने देश का नाम रोशन किया तो कानपुर की बेटी श्रद्धा शुक्ला एक नया रिकार्ड बनाने के सफर पर रविवार को रवाना हो गई। गंगा की लहरों की परवाह किए बगैर जलपरी के नाम से चर्चित 12 वर्ष की जलपरी 570 किलोमीटर का जल सफर पूरा करेगी। रविवार को मैस्कर घाट से बनारस के जल सफर के लिए रवाना हुई।

जलपरी श्रद्धा शुक्ला को मैस्कर घाट से पूर्व मंत्री राजपाल कश्यप तिरंगा दिखाकर रवाना किया। इस दौरान घाट पर मेले का माहौल दिखते ही बन रहा था। हर किसी की जुबान पर श्रद्धा का नाम और गंगा मां की जयकार दिखी।

पहले दिन किया 80 किलोमीटर का सफर
मैस्कर घाट से 570 किमी. के तैराकी सफर पर निकली श्रद्धा ने पहले दिन बक्सर पहुंचकर 80 किलोमीटर का सफर तय किया। पिता ललित शुक्ला ने बताया कि इस बीच कुछ स्थानों पर श्रद्धा को पानी के बहाव से काफी परेशानी हुई। कई मुश्किलें आईं लेकिन उसने अपना संघर्ष जारी रखा। बक्सर पहुंचने पर पूर्व शिक्षामंत्री अमरजीत सिंह ‘जनसेवक’ ने स्वागत किया। 

जलपरी को दी गई सुरक्षा
बारिश के कारण उफनाई गंगा में तैराकी कर रही जलपरी को सुरक्षा भी दी गई है। गंगा में दो नावें उसके पीछे चल रही हैं। इसमें चार नाव चालक, छह लाइफ गार्ड और खाने-पीने का सामान है। किसी भी खतरे के समय श्रद्धा को पूरी मदद की जाएगी।

पहले भी बनाए कई रिकार्ड
जलपरी श्रद्धा ने इससे पहले भी तैराकी में कई रिकार्ड बनाए हैं। इसमें 2010 में 6 वर्ष की उम्र के दौरान शुक्लागंज से अग्रसेन व्यायामशाला तक 6 किमी. गंगा में तैराकी की। 2011 में शुक्लागंज से जाजमऊ तक 7 किमी. तैराकी की। 2012 में गंगाबैराज से मैस्कर घाट तक 10 किमी. का सफर तय किया। 2013 में सरसैय्या घाट से सिद्धनाथ घाट तक 16 किमी. तैरी। 25 मार्च 2014 को कानपुर से इलाहाबाद तक 280 किमी. का रिकार्ड बनाया था।

Courtesy: livehindusthan. Com

विराट कोहली ने पेप्सिको आइकॉन के तौर पर एमएस धोनी की जगह ली

इससे पहले सोनी, डाबर और आम्रपाली जैसे ब्रांड से धोनी को हाथ धोना पड़ चुका

क्रिकेट इतिहास ने अब तक कई महान खिलाड़ियों को जन्म दिया है। कई खिलाड़ी बड़े बल्लेबाज़ बनकर सामने आये तो कई खिलाड़ी बड़े गेंदबाज़ बनकर, पर कुछ ही ऐसे खिलाड़ी हैं जो विश्व क्रिकेट में एक बड़े और सफल कप्तान के रूप में उभरें हो। ऐसे सफल कप्तानों में सौरव गांगुली, रिकी पॉन्टिंग, स्टीफेन फ्लेमिंग, मोहम्मद अज़हरउद्दीन और क्लाइव लॉयड जैसे दिग्गज शामिल हैं।

ऐसे ही दिग्गज और सफलतम कप्तानों में से एक हैं भारतीय सीमित ओवर के कप्तान एमएस धोनी। धोनी ने भारतीय टीम को जो सफलताएं दिलाई हैं उसे चाह कर भी कोई भारतीय समर्थक नहीं भूल पायेगा।

भले ही धोनी ने टेस्ट क्रिकेट से संन्यास ले लिया है लेकिन वो अभी भी भारत के लिए सीमित ओवरों में खेलते नज़र आ रहे हैं। पिछले कुछ समय से धोनी अपने उस रंग में नज़र नहीं आरहे हैं जिसके लिए वो जाने जाते थे। धोनी को आम तौर पर लोग एक मैच फिनिशर के रूप में जानते हैं पर पिछले कुछ समय से उनकी बल्लेबाजी में वो धार नज़र नहीं आ रही है, और इसका असर कुछ मैचों में दिखा भी है जब धोनी क्रीज़ पर मौजूद हों और भारतीय टीम एक, दो या 5 रनों से मैच हार गई हो।

धोनी के इस खराब फॉर्म का असर उनकी मार्केटिंग छवी पर भी दिखता नज़र आ रहा है। धोनी फिलहाल कई बड़ी कंपनियों के ब्रांड एम्बैसडर भी हैं पर हाल में ही एक बड़ी कम्पनी पेप्सिको ने धोनी की जगह भारतीय टेस्ट कप्तान विराट कोहली को दे दी है।

कारण ये ये कि धोनी लगातार फेल होते जा रहे हैं और विराट कोहली एक बड़ा चेहरा बन चुके हैं। विराट कोहली अभी अपने करियर के सबसे ऊंचे शिखर पर काबिज़ हैं जिसकी वजह से सभी बड़ी कम्पनियां उनके साथ हाथ मिलाना चाहती हैं।

पिछले 18 महीनों में धोनी के हाथों से ये चौथा ब्रांड है जो छूट गया है जिसमें सोनी, डाबर और आम्रपाली जैसे ब्रांड शामिल हैं। फिलहाल धोनी अपनी आत्मकथा पर आधारित फिल्म ‘एमएस धोनी: द अनटोल्ड स्टोरी’ को लेकर बेहद उत्साहित हैं।

Courtesy: sports keeda. Com

घाटी में शांति के लिए राजनाथ के नेतृत्व में 4 को जाएगा ऑल पार्टी डेलिगेशन

कश्मीर घाटी में पिछले 52 दिनों से हिंसा के माहौल को शांत करने में जुटी केंद्र सरकार अब कश्मीर के लिए ऑल पार्टी डेलिगेशन पर कदम बढ़ाते हुए काम शुरू कर दिया है. इसके तहत ऑल पार्टी डेलिगेशन 4 सितंबर को श्रीनगर जाएगा, जिसका नेतृत्व खुद गृह मंत्री राजनाथ सिंह करेंगे.

रविवार को राजनाथ सिंह ने जहां कश्मीर घाटी की सुरक्षा और वहां पर चल रहे कामों की समीक्षा की, वहीं बीजेपी के नेताओं से मिलकर ऑल पार्टी डेलिगेशन को लेकर रोड मैप तैयार किया. सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, इसके पहले राजनाथ कश्मीर घाटी भी जा सकते हैं.

पीएम भी घाटी के हालात पर चिंतित
सरकार ने अलग-अलग दलों के नेताओं के डेलिगेशनकी लिस्ट भी तैयार कर ली है. रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी 'मन की बात' में कश्मीर का जिक्र किया. कश्मीर के जख्मों पर मरहम लगाते हुए पीएम ने एक बार फिर कहा कि कश्मीर में चाहे नौजवानों का खून बहे या सुरक्षा बल के जवानों का खून हिंदुस्तान का ही बहता है. पीएम ने अलगाववादियों को कड़ा संदेश देते हुए कहा था कि घाटी में अशांति फैलाने वाले लोग जो बच्चो का इस्तेमाल कर रहे हैं. उनको इसका जवाब देना होगा. मोदी ने एकता और ममता को कश्मीर समस्या के समाधान का मूलमंत्र बताया था. इससे पहलेमहबूबा मुफ्ती भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलकर कश्मीर घाटी में फैली हिंसा की विस्तृत जानकारी प्रधानमंत्री को दे चुकी हैं.

दो बार कश्मीर जा चुके हैं गृह मंत्री
आपको बता दें कि राजनाथ सिंह दो बार पहले ही कश्मीर घाटी जा चुके हैं और कश्मीर में हिंसा को कम करने के लिए राजनीतिक पार्टियों के लोगों से मुलाकात कर चुके हैं. मीटिंग के दौरान गृह मंत्री ने कहा था कि जो लोग इंसानियत, जम्हूरियत और कश्मीरियत पर विश्वास करते हैं, उनके लिए सारे दरवाजे खुले हुए हैं. सरकार उनसे बातचीत के लिए तैयार है.

Courtesy: aajtak. In