यूनेस्को से विश्व धरोहर का तमगा ले चुकी मशहूर दार्जीलिंग हिमालयन रेलवे को रेल मंत्रालय IRCTC को देने जा रहा है. मंत्रालय इस फैसले के बाद अब यूनेस्को से बात करेगा. रेलवे बोर्ड के मेंबर ट्रैफिक मोहम्मद जमशेद ने आजतक से बातचीत में यह जानकारी दी.
जमशेद ने बताया कि देश में चुनिंदा जगह हैं, जहां ट्वाय ट्रेन अभी भी चल रही हैं और रेलवे ने इन सभी रेल सेक्शन पर टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए इस क्षेत्र की माहिर कंपनियों को इनका संचालन देने की तैयारी कर ली है. सबसे पहले न्यू जलपाईगुड़ी और दार्जीलिंग के बीच चलने वाली दार्जीलिंग हिमालयन रेलवे को IRCTC को सौंपा जाएगा. IRCTC को टूरिज्म क्षेत्र की बेहतर समझ है और ये उम्मीद की जा रही है यह सरकारी कंपनी अपनी विशेषज्ञता का इस्तेमाल यहां पर टूरिज्म को बढ़ाने के लिए करेगी.
रेलवे में वित्तवर्ष 2017 18 के लिए जारी किए गए अपने बिजनेस प्लान में बताया है कि वह हिल रेलवे में टूरिज्म डेवलपमेंट को लेकर नई पॉलिसी लाने जा रही है. हिल रेल टूरिज्म डेवेलपमेंट पॉलिसी के नाम से आने जा रही इस पॉलिसी में इस बात पर खास ध्यान दिया जाएगा कि किस तरीके से अलग-अलग स्टेकहोल्डर्स के साथ तारतम्यता बिठाया जाए.
मेंबर ट्रैफिक मोहम्मद जमशेद ने बताया कि दार्जीलिंग रेलवे के अलावा नीलगिरी माउंटेन नेरल माथेरान और कांगड़ा टॉय ट्रेन टूरिस्टों में काफी प्रसिद्ध है और इन ट्रेनों पर सवारी करने के लिए सैलानी खासतौर पर इन जगहों पर जाते हैं. विश्व प्रसिद्ध टूरिस्ट स्पॉट को जोड़ने वाली यह हिल ट्रेन्स पूरी दुनिया में अपना मकाम बना सके, इसके लिए रेलवे तैयारी कर रहा है. खास बात यह है कि रेलवे बोर्ड हिल रेलवेज को पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप में चलाने पर भी विचार कर रहा है. इसके लिए क्षेत्र में पारंगत कंपनियों की तलाश की जा रही है.
बिजनेस प्लान में इस बात का खास तौर पर जिक्र किया गया है कि हिल रेलवेज को इस तरीके से डेवलप किया जाएगा, जिससे संबंधित जगहों पर रहने वाले स्थानीय लोगों और टूरिज्म इंडस्ट्री को फायदा मिल सके. इसी के साथ इन जगहों पर विश्व स्तरीय रेलवे सुविधाएं मिल सके इसके लिए खास ध्यान दिया जाएगा.
Source:aajtak.in
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