जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। किडनी के मरीजों को अब आयुर्वेद की आधुनिक दवा का सहारा भी मिल गया है। आयुर्वेद के पारंपरिक फार्मूले की मदद से तैयार की गई आधुनिक दवा नीरी केएफटी को वैज्ञानिक शोध में प्रभावी पाया गया है। शरीर के सबसे महत्वपूर्ण अंगों में शामिल किडनी के गंभीर मरीजों के लिए इस समय सिर्फ डायलिसिस का ही विकल्प उपलब्ध है जो बेहद महंगा है और बहुत सीमित जगहों पर उपलब्ध है। ऐसे में यह आयुर्वेदिक दवा इस इलाज में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती है।
इस समय देश में हर दसवां व्यक्ति किडनी की समस्या से प्रभावित है, साथ ही लगभग पांच लाख लोगों को जीवन भर नियमित डायलिसिस की जरूरत है। इनमें से औसतन सिर्फ 40 हजार मरीज ही डायलिसिस का लाभ ले पाते हैं। ऐसे में आयुर्वेद के फार्मूले की मदद से तैयार की गई दवा नीरी केएफटी को वैज्ञानिक शोध में प्रभावी पाए जाना इन मरीजों के लिए बेहद उत्साहजनक है। दवा संबंधित वैज्ञानिक शोध प्रकाशन 'इंडो अमेरिकन जर्नल ऑफ फार्मास्यूटिकल रिसर्च' में प्रकाशित शोध के मुताबिक इस दवा को किडनी की बीमारियों के इलाज में प्रभावी पाया गया है।
सीटी इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मास्यूटिकल साइंसेज के पूर्व निदेशक अनिल कुमार शर्मा के नेतृत्व में जानवरों पर किए गए इस अध्ययन में कहा गया है कि इस दवा में उपलब्ध विविध सक्रिय तत्वों की मदद से लिपिड पैरोक्सिडेशन की वजह से होने वाले गुर्दे के नुकसान को रोका जा सकता है। यह दवा किडनी के जैव रसायनिक पैमानों को बेहतर करती है।
बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में आयुर्वेद संकाय के द्रव्य गुण विभाग के प्रोफेसर और पूर्व विभागाध्यक्ष कमल नयन द्विवेदी कहते हैं आयुर्वेद में गुर्दे की बीमारियों के इलाज के लिए कई दवाओं का वर्णन है और नीरी केएफटी उन्हीं फार्मूलों पर किए गए शोध से तैयार की गई है। यह दवा किडनी में भारी तत्वों और मेटाबॉलिक पदार्थो को मात्रा को नियंत्रित करती है साथ ही गुर्दे को एंटी ऑक्सीडेंट भी उपलब्ध करवाती है। यह दवा पुनर्नवा, कमल के फूल और पत्थरचूरा जैसी आयुर्वेदिक दवाओं से बनी है।
कुछ दिनों पहले वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआइआर) की प्रयोगशाला में मधुमेह के मरीजों के लिए विकसित आयुर्वेदिक दवा बीजीआर 34 को भी क्लीनिकल परीक्षण में प्रभावी पाया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विज्ञान भवन में सीएसआइआर के स्थापना दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में इस प्रगति को ले कर उत्साह जताते हुए गंभीर रोगों के लिए आयुर्वेद पर आधारित दवाओं को तैयार कर उनके प्रभाव पर वैज्ञानिक शोध करने की अपील की थी।
Source:jagran.com
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