नई दिल्ली
बहुप्रतीक्षित रेल डिवेलपमेंट अथॉरिटी के गठन को कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद अब इंडियन रेलवे में भी बड़े बदलाव की शुरुआत हो सकती है। इस अथॉरिटी के पास न सिर्फ यात्री और मालभाड़े में बढ़ोतरी की सिफारिश करने का अधिाकार होगा बल्कि यह यात्रियों को मिलने वाली सब्सिडी के मामले में भी फ्रेमवर्क बनाएगी। इसके अलावा ट्राई की तरह ही इस अथॉरिटी की यह जिम्मेदारी होगी कि वह प्रतिस्पर्धा के लिए रेलवे और प्राइवेट प्लेयर्स को बराबरी के अवसर प्रदान करे।
इसके अलावा वह उपभोक्ताओं के हितों की भी रक्षा करेगी। रेलवे को उम्मीद है कि इसी साल एक अगस्त से यह रेगुलेटरी अथॉरिटी काम करना शुरू कर देगी। हालांकि किराये में बढ़ोतरी के मामले में अथॉरिटी सिर्फ सिफारिश ही कर सकेगी यानी किराए बढ़ाने के मामले में अंतिम फैसला सरकार के पास ही रहेगा।
ऐक्ट में संशोधन नहीं होगा
कैबिनेट ने इस अथॉरिटी के गठन के लिए जो प्रस्ताव पारित किया है, उसके मुताबिक इस अथॉरिटी के गठन के लिए रेलवे ऐक्ट में कोई संशोधन नहीं होगा बल्कि सरकार एक एक्जिक्यूटिव ऑर्डर के जरिये इस अथॉरिटी को बनाएगी। इस फैसले से अब होगा यह कि यह अथॉरिटी खर्चों और आमदनी का जायजा लेने के बाद रेल किराये में बढ़ोतरी की सिफारिश ही कर सकेगी। इसके बाद सरकार उस सिफारिश पर फैसला लेगी। ऐसे में अंतत: रेल किराये के बारे में फैसला करने का अधिकार सरकार के पास ही होगा।
इससे पहले यह माना गया था कि अगर रेलवे ऐक्ट में संशोधन करके यह अथॉरिटी के गठन का प्रस्ताव पारित होगा। जिससे रेल किराया बढ़ाने के अथॉरिटी का फैसला ही फाइनल होता ओर इस मामले में नेताओं की भूमिका समाप्त हो जाती, लेकिन अब रेलवे के किराये पर अंतिम फैसला सरकार करेगी। सिर्फ अथॉरिटी सिफारिश ही कर सकेगी। रेलवे सूत्रों का कहना है कि अगर इस अथॉरिटी के गठन के लिए रेलवे ऐक्ट में संशोधन किया जाता तो उसके लिए संसद में बिल लेकर जाना पड़ता। उस स्थिति में लंबा वक्त लगता।
हालांकि रेलवे अफसरों का कहना है कि अथॉरिटी बनने से यह फायदा होगा कि जब भी अथॉरिटी किराया बढ़ाने की सिफारिश करेगी तो सरकार अब तक की तरह आंख-कान नहीं मूंद पाएगी और उसे किराया बढ़ाने के बारे में कुछ न कुछ फैसला लेना होगा। इस तरह से राजनीति के लिए रेलवे के दुरुपयोग पर कुछ रोक लगेगी।
Source:indiatimes.com
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