रांची, आठ सितंबर भाषा उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडु ने आज यहां कहा कि आजादी के सार वर्षों बाद भी देश में 30 करोड़ लोगों का निरक्षर होना शर्म की बात है और इन सभी बचे हुए लोगों को साक्षर बनाने के लिए सरकार के साथ समस्त देश को कटिबद्ध होना होगा।
अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस पर आज यहां आयोजित एक कार्यक््रुम में अपने संबोधन में उपराष्ट्रपति ने यह बात कही। साथ ही उन्होंने सचेत किया कि यह कोई राजनीति का विषय नहीं है अपितु सभी देशवासियों के लिए चिंतन और आत्म निरीक्षण का विषय है।
नायडु ने कहा, देश को आजाद हुए सार वर्ष हो गये लेकिन इतने वर्षों बाद भी यहां लगभग बीस प्रतिशत लोग निरक्षर हैं अर्थात देश के लगभग तीस करोड़ लोग निरक्षर हैं। ऐसा होना देश के लिए शर्म की बात है।
उन्होंने कहा कि यह देश के लिए एक चुनौती है क्योंकि गरीबी दूर करने के लिए शिक्षा आवश्यक है। इतना ही नहीं शिक्षा देश के विकास, भ्रष्टाचार निवारण, जुल्म मिटाने, कुरीतियों को दूर करने तथा आर्थकि विकास के लिए भी आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं है कि आजादी के बाद जो सरकारें बनीं उन्होंने देश से निरक्षरता एवं गरीबी मिटाने के लिए कुछ नहीं किया। उन्होंने भी इसके लिए प्रयास किये और उसी के चलते आज अस्सी प्रतिशत लोग साक्षर बन सके हैं लेकिन इस कार्य में सरकार के साथ जनभागीदारी भी आवश्यक है।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि आज अक्षरोत्सव है। पढ़ना आगे बढ़ने के लिए और व्यक्तित्व विकास के लिए आवश्यक है।
उन्होंने देश में साक्षरता के लिए चलाये जा रहे अभियान को स्वाभिमान के लिए चलाया जा रहा अभियान बताया।
उन्होंने कहा कि शिक्षा ग्यान के लिए और आर्थकि प्रगति के लिए भी आवश्यक है।
इस अवसर पर महिला पंचायत मुखिया, साक्षरता के लिए प्रेरकों एवं नव साक्षरों को भी सम्मानित करते हुए नायडू ने कहा कि झाारखंड़ सरकार ने 2019-20 तक राज्य में पूर्ण साक्षरता का लक्ष्य हासिल करने की बात कही है जो बहुत ही प्रशंसनीय है।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि तीन वर्षों के शासन काल में रघुवर दास की सरकार ने 32 लाख लोगों को साक्षर बनाया है जो एक बड़ी सफलता है।
उन्होंने कहा कि देश में महिलाओं की साक्षरता दर पुरुषों के मुकाबले कम है जबकि भारत में महिलाओं के सशक्तीकरण एवं उनके नेतृत्व की परंपरा रही है। उन्होंने कहा कि पौराणिक काल में भी सरस्वती शिक्षा की देवी, लक्ष्मी धन की देवी और दुर्गा रक्षा की देवी रही हैं।
नायडु ने कहा कि महिलाओं को साक्षर किया जायेगा तो वह परिवार के बच्चों में सुसंस्कार लायेगी। इतना ही नहीं वह स्वयं सहायता समूह बनाकर स्वरोजगार प्रारंभ कर सकती हैं।
बाद में ग्रामीण महिलाओं एवं नवसाक्षर महिलाओं के कुछ सवाल के जवाब भी उपराष्ट्रपति ने दिये जिसमें उन्होंने कहा कि महिलाएं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के स्वच्छता अभियान में भाग लेकर और शिक्षा ग्रहण कर अपने क्षेत्र का विकास कर सकती हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षित महिला अंधविास दूर करने, बाल विवाह रोकने एवं सामाजिक कुरीतियों को खत्म करने में योगदान दे सकती हैं।
Source:repository.com
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