सुनवाई नहीं होने पर कोई दोगुना खतरा नहीं
- सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि यदि एक अभियुक्त को अभियोजन की अवैध मंजूरी के आधार पर आपराधिक अपराध से छुट्टी मिल गयी थी तो किसी दोगुने खतरे की बात नहीं उठती है।
- संविधान का अनुच्छेद 20 कहता है कि एक व्यक्ति पर समान अपराध के लिए दो बार मुकदमा नहीं चलाया जा सकता या उसे दंडित नहीं किया जा सकता है।
- यह निर्णय मिजोरम राज्य द्वारा दायर किये गए अपील पर आधारित है।
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