Thursday, 3 August 2017

राज्यसभा चुनाव: NOTA के इस्तेमाल पर सुप्रीम कोर्ट ने तुरंत रोक से इंकार किया


राज्यसभा चुनाव में नोटा (NOTA) यानी None of the Above के इस्तेमाल के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट आज सुनवाई करते हुए तुरंत रोक लगाने से इंकार कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस से पूछा है कि आप इतनी देर से क्यों आए, जबकि इसका नोटिफिकेशन जनवरी 2014 में ही जारी कर दिया गया था।

बता दें कि गुजरात कांग्रेस ने आगामी गुजरात राज्सभा चुनाव में नोटा के इस्तेमाल को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी।  गुजरात कांग्रेस की ओर से दाखिल याचिका में कहा गया है कि नोटा का प्रावधान संविधान में नहीं है और न ही कोई कानून है। यह भी कहा गया है कि यह सिर्फ चुनाव आयोग का सर्कुलर है। ऐसे में ये नोटा जनप्रतिनिधि अधिनियम 1951 का उल्लंघन करता है। याचिका में मांग की गई है कि सुप्रीम कोर्ट नोटा के इस्तेमाल पर रोक लगाते हुए इसे रद्द करे और असंवैधानिक करार दे। 

आपको बता दें कि गुजरात में तीन राज्यसभा सीटों के लिए 8 अगस्त को चुनाव होने हैं। याचिका में चुनाव आयोग, केंद्र सरकार, गुजरात विधानसभा सचिव को पक्षकार बनाया गया है। 

नोटा के खिलाफ भाजपा भी चुनाव आयोग में

भाजपा ने भी नोटा के खिलाफ बुधवार को चुनाव आयोग में दस्तक दी है। गुजरात में राज्यसभा चुनाव के दौरान नोटा का इस्तेमाल नहीं करने की अपील के साथ भाजपा अब कांग्रेस के पदचिन्हों पर ही चल रही है। सत्तारूढ़ दल ने अपने ज्ञापन में कहा है कि राज्यसभा में नोटा के इस्तेमाल से पहले सभी दलों के बीच आम राय बनायी जानी चाहिये। भाजपा का कहना है कि चूंकि राज्यसभा के चुनाव में कोई गुप्त मतदान नहीं होना है। इसलिए नोटा का मकसद ही पूरा नहीं होता है। इस बीच, संसदीय राज्यमंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा है कि इन चुनावों के लिये राजनीतिक दल व्हिप जारी करते हैं। लेकिन नोटा का विकल्प व्हिप की प्रकृति के ही खिलाफ है।
दरअसल सितंबर 2013 में सुप्रीम कोर्ट का आदेश था कि सभी चुनावों में नोटा लागू किया जाए। सितंबतर 2014 में यूपीए सरकार के वक्त लागू किया गया था।

Source:livehindusthan.com

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